एक कविता कोई / Ek Kavita Koi । कविता । चंद्रबिंद ।

      एक कविता कोई

                        चंद्रबिंद 




एक कवि
 बार - बार
अपनी कविताओं को
गिने जा रहा था।


पर 
हर बार
एक कविता 
कम पड़ जा रही थी।







फिर क्या 
कवि परेशान हो गया
उसे समझ में नहीं आ रहा था
आख़िर एक कविता 
गई तो गई कहाँ ?


कवि को चिंतित देख
उसके पुत्र ने कहा
आप तो ऐसे परेशान हो रहे हैं
मानो वह कविता नहीं "कोई"... ।


पुत्र का यह "कोई" 
इतना विराट था
कि उसके समक्ष
अब कवि भी अवाक् था ।


वह इंतज़ार करता रहा
करता रहा
करता रहा
 वह इंतज़ार ।


उस उपमा का
जो हमारी भाषा में
कुछ भी हो सकता है
पर कविता नहीं।



                    चंद्रबिन्द 

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