सिपाही / Sipahi । कविता । निधि नितिमा ।

                सिपाही

                          निधि नितिमा 



आसान कहां होता है
 एक सिपाही बन जाना
हिम्मत धैर्य से 
देश का काम आ जाना।

जिंदगी की मुश्किलें
 खुद ही सुलझाना 
और मजबूत बनना।






दिल का दर्द और 
माथे की लकीरों में 
छिपी चिंता को 
सबसे छुपाना।

मन में फिक्र देश की,
फिर भी परिवार के लिए
हरदम मुस्कुराना।

ऐसे में कहाँ आसान
 होता है एक सिपाही का
जिगरी दोस्त बनना।

बिना ट्रेनिंग का ही 
आधा सिपाही बन जाना
ग़र दोस्त परेशान
तो खुद परेशान होना
पर किसी को नहीं बताना।

जब तक ड्यूटी करे
कोई कॉल नहीं आए 
तब तक उसकी सभी
सलामती की दुआ ही करे।

बहुत मुश्किल होता है 
एक सिपाही से दोस्ती निभाना
और उससे भी मुश्किल 
एक सिपाही होना
देश के लिए अपनी जान
 न्यौछावर करना।

मुझे गर्व है ख़ुद पर
ऐसे एक जांबाज सिपाही
 की मैं दोस्त हूं
जो तन से नहीं मन से
 देश का सच्चा सिपाही है।

    

                     निधि नितिमा 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अधूरी यात्रा /। Adhoori Yaatra । हिमांशु कुमार शंकर ।

उसकी मां / Usaki Maa । कहानी । कुमार सरोज ।

लव डे / Love Day । गजल । कुमार सरोज ।