एक दोस्त / Ek Dost । कहानी । निधि नितिमा ।
एक दोस्त
निधि नितिमा
हां भूला नहीं जाता , कुछ संस्मरण जिंदगी भर याद रहते हैं, और कुछ जिंदगी ही बदल कर रख देते हैं ।ऐसा ही वाकया कुछ मेरे साथ हुआ।
जुलाई का महीना, और बरसात का मौसम था, हल्की हल्की बूंदाबांदी हो रही थी। सुबह के 4:30 बजे हर रोज की तरह में कविताएं लिख रही थी। अचानक एक मैसेज आया,.. " हेलो दोस्त , गुड मॉर्निंग। " एक बार तो नजरअंदाज कर दिया , फिर दोबारा मैसेज की आवाज आई - कैसे हैं आप ? इतनी जल्दी उठ गए । " सोचा यह कौन दोस्त बन गया ?रिप्लाई दिया " गुड मॉर्निंग, अच्छी हूं। कविता ही लिखती हूं इस टाइम। "
और यूं ही बातों का सिलसिला शुरू हो गया । एक दो बार तो सोचा कि मैं क्यों बातें कर रही हूं, कोशिश की नजर अंदाज करने की, पर उनका अंदाज कुछ ऐसा था कि नजरअंदाज नहीं कर पाए ।
धीरे-धीरे जब बातों का सिलसिला शुरू हुआ एक दूसरे के विचार जाने, एक दूसरे की पसंद ना पसंद पता चली , तो लगा बहुत कुछ दिनों की मन पसंद है मिलता जुलता है । ऐसा लगने लगा कि जिंदगी में जिस चीज की कमी थी या यूं कहिए कि जो कुछ खो गया था, शायद प्रकृति उसे वापस लौटा रही थी , वह भी सूद समेत । मैंने खुश रहना शुरू कर दिया, हंसना शुरू कर दिया। कुछ तो मेरा मनपसंद मौसम बरसात का मौसम, जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद है और कुछ दोस्त का बन जाना वह भी अपने ही जैसी प्रकृति का , तो यह सोने पर सुहागा ही हुआ। जरूरी नहीं कि महिला हू तो महिला मित्र ही हो, यूं तो बहुत सारी है, लेकिन कभी-कभी आप जिससे अपनी भावनाएं शेयर करते हैं या जिससे अपना सुख दुख शेयर करते हैं वह जरूरी नहीं होता कि वह महिला है, या पुरुष। मित्र तो मित्र होता है। बस इतना है कि मेरे सुख में वह साथ है , तो उनके दुख में मैं उनके साथ खड़ी हूं। वे अपने कैरियर के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और मैं उनकी हिम्मत बनना चाहती हूं, उनके साथ खड़ी हूं। और भगवान से हर वक्त यही प्रार्थना करती हूं कि वह अपने कर्म क्षेत्र में अव्वल नंबर पर सफल रहे। और हमारी दोस्ती हमेशा यूं ही बरकरार रहे।
निधि नितिमा
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