अनमोल मिलन / Anamol Milan । कविता । निधि नितिमा ।
अनमोल मिलन
निधि नितिमा
जब मिले थे हम तुम
यू नितांत अजनबी की तरह।
दिल से दिल मिले हुए थे
फिर भी
दोनों के बीच एक दूरी थी।
कुछ संकोची
कुछ मर्यादा
मौन में ही पसरी थी।
फिर जब
झेली विरह वेदना
तब समझ आया है प्यार कितना।
फिर जब
आए तुम इस बार मिलने
प्रकृति भी शृंगार कर उठी।
मद मस्त बारिश हुई झूम के
पुलकित होकर वायु चल पडी
ऐसे में जब दो दिल मिलते है।
आँखों से आंसू गिरते हैं
याद करके
वो हिज्र की रातें ।
कैसे बताई तुमको सब बातें
तब तुम बोले भूल जाओ
सब हिज्र की बात।
याद रखो सिर्फ अपनी मिलन
प्यार हमारा है पवित्र
इसका ना कोई है मोल ।
चाहें हम पास हो
या हो दूर
ये है मिलन अनमोल।
निधि नितिमा
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