दोस्ती / Dosti । कविता । निधि नितिमा ।
दोस्ती
निधि नितिमा
ये वो है जो आपके हर ग़म की दवा है,
एक दूसरे की सिर्फ खुशियां ही नहीं,
बल्कि ग़मों को भी अपना समझते हैं,
वो है दोस्त।
खुशियों में तो घर वाले संग होते हैं,
पर दुखों में संग होते हैं सिर्फ दोस्त,
दोस्ती का रिश्ता आप से शुरू होकर,
तू पर खत्म होता हैं
वो है दोस्त।
बचपन से शुरू होकर जीवन भर चलता है,
कॉलेज की बातें हो,
या हो पहले प्यार की,
जीवन संघर्ष की हो,
या हो आराम की,
वो दोस्त ही होते है,
जो चलते हैं हर कदम संग।
दोस्त हो ग़र साथ तो,
जीत सकते हो जिंदगी की हर जंग,
दोस्त हैं तो जिन्दगी जन्नत है,
दोस्तो
ये दोस्ती खुदा की रहमत है।
दोस्ती, ढाई अक्षर का ये शब्द,
सारे रिश्तों से वजनदार है,
सिर्फ खून के रिश्ते ही साथ नहीं देते, दोस्ती का रिश्ता तो,
मरते दम तक साथ निभाता है।
किसी से प्रेम करना ही,
दिल का रिश्ता नहीं होता,
दिल के रिश्ते दोस्ती से भी,
अटूट बंधे होते हैं।
जो कोई जात पात,
धन वैभव नहीं देखती,
बस जहाँ मन मिले,
हो जाती है।
दोस्ती एक प्यारा सा एहसास है,
जो अनजान लोगों को एक बंधन मे बांधती है।
बड़े खास होते है वो लोग,
जो आपकी जिंदगी मे दोस्त बनकर आते हैं।
दोस्त ना हो तो बेरंग है जिंदगी,
कभी धुआं, तो कभी नीरस हैं जिंदगी।
निधि नितिमा
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