सिमरिया घाट ( Simariya Ghat ) का श्रावणी मेला - एक झलक । बिहार गौरव ।

एक झलक : श्रावणी मेला सिमरिया घाट 



                     यूं तो बिहार में अनेक जगहों पर श्रावणी मेला लगता है। उसी में से एक बिहार के बेगूसराय में सिमरिया घाट के श्रावणी मेला भी प्रसिद्ध है। वर्तमान समय में सावन महीने में कई जिलों से लोग गंगा स्नान करते हैं फिर गरीबों को दान करते हैं। उनमें से ज्यादातर लोग बिहार से आते हैं।





                  सिमरिया घाट बेगूसराय शहर से करीब 20 किलोमीटर दक्षिण गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह गांव राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि के रूप में काफी मशहूर है। वही दूसरी तरफ बेगूसराय जिले के उत्तरी सीमांचल क्षेत्र में हरिगिरीधाम ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल दर्शनीय स्थल है। यहां का प्राचीन शिव मंदिर हरिगिरीधाम है, जो सैकड़ों वर्ष पुराना यहां शिवलिंग स्थापित हैं। यहां भी प्रत्येक वर्ष सावन महीने में सिमरिया घाट से कांवरिया जल भरकर बाबा हरिहरनाथ को जल अर्पित करते हैं तथा मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। सावन के माह में की जाने वाली इस यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है। सावन के माह में सड़कों पर गेरुआ वस्त्र पहने कंधे पर जल का पात्र से बंधे कांवड़ को लेकर बोल-बम का नारा लगाते हैं भक्तों को देखते हैं जो शिव मंदिरों के लिए पैदल यात्रा करते हैं। 




                आज के बदलते पीढ़ी में युवा कावरियों ने अपना कला प्रस्तुत करते हुए शिव मंदिर तक जाते हैं तो कोई डीजे के साथ रंग-बिरिंगे गानों के साथ झूमते हुए बाबा के दरबार पहुंचते। अगर यहां देखा जाय तो इनकी ये पैदल यात्रा ही कांवड़ यात्रा कहलाएगी। 

             सावन का महीना लोगों को ईश्वर से जुड़ने का और भगवान की भक्ति के लिए सबसे उत्तम है। हर तरफ मंदिरों में लोगों की भीड़, भजन-कीर्तन की आवाज, मंत्रोच्चारण और बड़े-बड़े मेलों का आयोजन इस माह की महत्वता को और भी बढ़ा देता है। सावन के माह में महिलाएं उपवास रखती हैं और अपने परिवार के स्वस्थ रहने की कामना करती हैं। भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ श्रावणी मेला में ही लगती है।

            भारत में प्रसिद्ध भगवन शिव के भक्तों द्वारा किए जाने वाला कांवड़ यात्रा भी इसी महीने में ही किया जाता है। यह महीना किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी समय किसान कई प्रकार के अनाज, सब्जी और फूल आदि की बुआई करते हैं। धान, मक्का, ज्वार, बाजरा जैसे कई प्रकार की सब्जी आदि की बुआई सावन के महीने में किया जाता है। कहने को तो सावन का महीना एक हिन्दू भक्ति महीना होता है, लेकिन सावन का यह महीना सभी के लिए राहत का महीना होता है। अप्रैल से जून तक की भीषण गर्मी से मनुष्य और जीव दोनों त्रस्त अथवा अस्त-व्यस्त हो जाते है, पेड़-पौधे, नदी, नहर, तालाब और कुएं आदि सुख जाते हैं और कई स्थानों पर तो सूखे जैसे हालात बन जाते है जो लोगों को बदहाल कर देता है। जैसे ही सावन का महीना आती है तेज़ बारिश पृथ्वी के इस बदहाल वातावरण में एक नई जान जीव तथा जंतुओं को राहत देता है। हर तरफ खुशी की एक नई लहर दिखने लगती है।




           श्रावणी मेले में सिमरिया घाट के चारों तरफ़ रंगबिरंगे तरह-तरह की दुकानें सजी रहती हैं। एक तरफ़ चाट-पकौड़े, मिठाई और आइसक्रीम वाले रहते हैं तो दूसरी तरफ़ खिलौने और मुखौटे वाले। कोई तीर-कमान बेचते, तो कोई बाजा। तरह-तरह की आवाजें गूंजती रहती है। बच्चों बैलून में झूम रहे होते तो कोई बच्चों नदी में तैराकी का आनंद उठाते है। वाकई श्रावणी मेला में मजे ही कुछ और है। सरकार के द्वारा पुलिस प्रशासन भी वहां तैनात रहते हैं साथ ही श्रावणी मेले में गंगा नदी के तट पर हर पल एनडीआरएफ की टीम तैनात रहते हैं,जिससे वहां के भक्तजनों के साथ कोई समस्या न हो। 

                     

                   हिमांशु कुमार 'शंकर'
                             मंझौल 
                     जिला - बेगूसराय

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