संभलना सीखा दिया / Sambhalana Seekha Diya । कविता । कुमार पिंटू ।

            संभलना सीखा दिया

                                  कुमार पिंटू 




आज हमें ठोकरो ने संभलना सीखा दिया, 
मुश्किल भरे राहो में चलना सीखा दिया ।


जिंदगी आखिर इसी को समझ बैठा था, 
बेजान सवालो में मानो उलझ बैठा था, 
सही गलत को हमे परखना सीखा दिया, 
आज हमें ठोकरो ने संभलना सीखा दिया।






मुश्किलो से कैसे लड़ना है आज मैने सीखा है, 
गिरकर कैसे संभलना है आज मैने सीखा है, 
दांव पेंचो से चलता आज का ज़माना है, 
इस सच को देखा और हमने पहचाना है, 
इन विपरीत हालतो ने हमें जीना सीखा दिया, 
आज हमें ठोकरो ने संभलना सीखा दिया।


खाली गम के पल नही रहते खुशी के पल भी आते हैं,
जब छटते है बादल गम के खुशी के बादल भी छाते है,
हमें इन्ही हालतो ने कुछ करना सीखा दिया, 
आज हमें ठोकरो ने संभलना सीखा दिया ,
मुश्किलो भरे राहो में चलना सीखा दिया।


                           कुमार पिंटू 

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