तुम मुझसे मिलने आओगे / Tum Mujhase Milane Aaoge । कविता । निधि नितिमा ।
तुम मुझसे मिलने आओगे
निधि नितिमा
जब जिंदगी एक पहेली लगे ,
उलझन तुम्हारी सहेली लगे ,
जब मन वीरान हो जाए ,
कुछ भी समझ ना आए ,
क्या मुझसे मिलने आओगे ,
क्या तुम मेरा साथ निभाओगे ?
जब जब कर्कश तीर तानों से ,
मन भीतर छलनी हो जाए ,
जब अपनों की बातों से ,
नित घाव हरे हो जाएं ,
जब मन बैरागी हो जाए ,
क्या तुम मुझसे मिलने आओगे ,
क्या मेरा साथ निभाओगे ?
जब अपने ही लूटे दिन का चैन ,
जब नींद ना आए सारी सारी रैन ,
जब बिजुरिया सी लगे तेरी यादें ,
जब याद आये सारी बाते ,
क्या तुम मुझसे मिलने आओगे ,
क्या मेरा साथ निभाओगे ?
जब शब्द बाण चले नुकीले ,
जीवन पथ लगे रेतीले ,
जब मन दुखों का गागर हो ,
नयन आसुओ का सागर हो ,
मैं तुझसे मिलने आऊंगा ,
मैं तेरा साथ निभाऊंगा ।
जब चंदा की चांदनी ना सुहाए ,
मन व्याकुल होकर भरमाये ,
जब मन का पंछी आतुर होकर ,
चहुं ओर व्यर्थ ही फड़फड़ाए ,
मैं तुझसे मिलने आऊंगा ,
मैं तेरा साथ निभाऊंगा ।
दुनिया देगी ताना तुझको ,
मत भुला देना तुम मुझको ,
चाहे जख्म हो कितना गहरा ,
प्यार हमारा सागर से भी गहरा ,
उस पल मुझको याद करना तुम ,
बस यह जान लेना तुम ,
मेरी जान हो जाने जहान हो ,
मैं अपना वादा निभाऊंगा ,
तुझसे मिलने आऊंगा ,
मैं तेरा साथ निभाउंगा ।
निधि नितिमा
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