इश्क कमीना / Ishq Kameena । कहानी । कुमार सरोज ।
समय के साथ मोहित एवं विवेक हाजीपुर से ही +2 अच्छे अंक से पास कर जाते हैं।
विवेक के पिता उसे आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली भेजना चाहते थे। विवेक जाने के लिए तैयार भी हो जाता है।
मोहित की मां भी उसे आगे की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली ही भेजना चाहती थी। मगर वह जाने से साफ इंकार कर देता है। वह अपनी मां को छोड़कर कहीं और जाना नहीं चाहता था। वह पटना के ही किसी कॉलेज से स्नातक करना चाहता था।
विवेक भी मोहित को साठ दिल्ली पढ़ने जाने के लिए बहुत कहता है मगर वह किसी की बात नहीं सुनता है।
इसी बीच विवेक की बड़ी बहन नयना की शादी ठीक हो जाती है। शादी का दिन निश्चित हो जाने के कारण विवेक दिल्ली पढ़ने नहीं जा पाता है।
विवेक की बहन नयना की शादी में उसके चाचा के साथ दिल्ली से उनके एक दोस्त सुधाकर सिंह की बेटी सिमरन भी आती है।
विवेक की बहन को मोहित भी अपनी बहन जैसा ही प्यार करता था। इसीलिए वह उसकी शादी के कामों में बहुत बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेता है।
और नयना की शादी में वो हो जाता है जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था। मोहित और सिमरन कुछ ही दिनों में इतने नजदीक आ जाते हैं कि दोनों संग जीने और मरने का ख्वाब देख डालते हैं।
इश्क भी बड़ी ज़ालिम चीज़ होती है, तभी तो जहां मोहित अभी तक मां की मदद एवं उसकी सेवा के लिए घर पर ही रहकर पढ़ाई करना चाहता था वही अब सिमरन के प्यार में पड़कर वह भी दिल्ली पढ़ने जाने को तैयार हो जाता है। क्योंकि सिमरन भी उसी कॉलेज में एडमिशन ली थी जिसमें विवेक लिया था।
जैसे ही मोहित की मां को इस बात की जानकारी मिलती है कि अब वह दिल्ली पढ़ने जाने को तैयार हो गया है तो सुनकर वह खुशी से फूली नहीं समाती है। वह तो कब से यही चाह रही थी।
मोहित सिमरन से प्यार वाली बात किसी को नहीं बताता है। बस विवेक जानता था। वह भी मोहित के कम से कम अब सिमरन के बहाने ही दिल्ली जाने की बात सुनकर बहुत खुश था।
कुछ ही दिन के बाद विवेक के साथ मोहित भी दिल्ली आ जाता है। वह भी उसी कॉलेज में एडमिशन ले लेता है जिसमें विवेक और सिमरन पहले ही एडमिशन ले चुके थे।
मोहित और सिमरन का इश्क अब विवेक के देख रेख में पढ़ाई के बहाने धीरे धीरे परवान चढ़ने लगता है। दो जवां दिल एक दूसरे की यादों में हमेशा धड़कने लगता है। अब इश्क की नई इबादत रोज बनने लगती है।
मगर शायद दोनों के नसीब में इश्क का परवान मंजिल तक चढ़ना लिखा हुआ ही नहीं था। तभी तो जैसे ही सिमरन के पिता को उसके और मोहित के प्यार वाली बात की भनक लगती है, तो वो तुरंत विवेक के चाचा के पास भागे भागे आ जाते हैं। वो तो सिमरन की शादी विवेक से करना चाहते थे।
इस बात की जानकारी जैसे ही विवेक के चाचा को लगती है तो सुनकर वो भी चौंक जाते हैं। उन्हें मोहित से ऐसी उम्मीद नहीं थी। आखिर मोहित एक गरीब किसान का बेटा था। उसके घर में उसकी विधवा मां के सिवा कोई और था भी तो नहीं। विवेक के चाचा पहले सिमरन और विवेक से ही इस मुद्दे पर बात करने को सोचते हैं।
विवेक सिमरन के पिता को यह कहकर कि वह मोहित से बात करके उसे सिमरन से दूर होने के लिए मना लेगा, उन्हें एवं अपने चाचा शांत करा देता है।
मगर जब विवेक सिमरन से बात करता है तो वह किसी भी क़ीमत पर मोहित को भुलने से साफ मना कर देती है। वह किसी भी हालत में मोहित से दूर नहीं रह सकती थी।
सिमरन की मां सुचित्रा भी अपनी बेटी को बहुत समझाती बुझाती है मगर कोई फ़ायदा नहीं होता है।
अंत में अपनी बेटी के जिद्द के कारण सुधाकर सिंह मन ही मन मोहित को ही खत्म करने का निश्चय कर लेते हैं।
सुधाकर सिंह विवेक के चाचा से मिलकर मोहित को रास्ते से हटाने की पूरी योजना भी बना डालते हैं।
मोहित को विबेक से जैसे ही इस बात की जानकारी मिलती है तो वह सुनकर बैचैन हो उठता है। उसे उसका प्यार बिछड़ने का गम सताने लगता है। मगर विवेक जब मोहित को सिमरन से मिलाने का वादा करता है तो उसका हिम्मत कुछ बढ़ाता है।
मोहित को अपनी दोस्ती और प्यार पर पुरा विश्वास था इसीलिए वह विवेक की बात सुनकर निश्चिंत हो जाता है।
मगर दो दिन बाद ही वह हो जाता है जिसकी कल्पना मोहित ने कभी सपने में भी नहीं किया था। सिमरन मोहित को भुलाकर विवेक से शादी करने को तैयार हो गई थी। विवेक भी सिमरन से शादी करने को तैयार हो गया था। i
जब मोहित को इस बात की जानकारी मिलती है तो वह तुरंत विवेक से मिलने चल देता है।
जब वह विवेक से मिलता है तो संयोग से वहां पर उस समय सिमरन भी रहती है। जब मोहित दोनों से शादी करने की बात के बारे में पूछता है तो उलटे दोनों मोहित के गरीबी का मज़ाक उड़ाने लगते हैं। वे दोनों तो शुरू से ही मोहित के भोलेपन एवं गरीबी से खेल रहे थे।
मोहित का देखा सपना चकनाचूर होकर टूट जाता है। आज तक जिंदगी में वह जिस दोस्त पर सबसे ज्यादा भरोसा किया था उसी ने उसके भरोसे का खून कर दिया था। जिसे अपनी जान से ज्यादा चाहा था उसी कमिने दोस्त ने उसे इश्क में आज दगा दिया था।
मोहित का दिल टूट जाता है। उसे सिमरन पर तो नहीं मगर अपने दोस्त पर पुरा विश्वास था। मगर उसने ही उसके साथ विश्वासघात किया था। जिस दोस्त ने उसे कल प्यार करना सिखाया था वही दोस्त आज उससेे उसकी मोहब्बत छीनने जा रहा था।
मोहित किसी से कुछ नहीं बोलता है। बस वह बुझे मन चुपचाप अपने गांव आ जाता है। वह करता भी क्या ! उसे तो उसके बचपन के सबसे खास दोस्त ने दगा दिया था। एक कमिने दोस्त ने इश्क के लिए दगा देकर इश्क को भी आज कमीना बना दिया था।
जब मोहित पढ़ाई बीच में ही छोड़कर दिल्ली से वापस अपने गांव आ जाता है तो उसकी मां घर वापस आने का कारण उससे पुछती है मगर वह कुछ नहीं बताता है। मोहित अपनी मां को सिर्फ यही बताता है कि उसे दिल्ली में तुम्हारे बिना मन नहीं लग रहा था इसीलिए वापस गांव आ गया। बेचारी मां इस झूट को ही सच मानकर चुप हो जाती है।
मोहित गांव तो आ गया था, मगर यहां उसका जरा भी मन नहीं लग रहा था। वह अन्दर ही अन्दर घुटते रहता था। वह अपने दिल का हाल किसी को बता भी तो नहीं सकता था।
उधर विवेक और सिमरन के शादी की तिथि भी तय हो जाती है। विवेक के चाचा दिल्ली में ही दोनों की शादी करवाना चाहते थे। मगर विवेक गांव में ही शादी करने के जिद्द पर अड़ जाता है।
अंततः सभी विवेक और सिमरन की शादी गांव में ही करने को तैयार हो जाते हैं।
इधर गांव में जब मोहित से दिल की बैचैनी सहा नहीं जाता है तो वह सारी बात अपनी मां को बता देता है। सुनकर उसकी मां पहले तो उदास होती है मगर फिर अपनी हैसियत देखकर अपने बेटे को समझाकर उसे सपना समझकर भूल जाने को कहती है। मोहित को भी अपनी मां की बात अच्छी लगती है।
उधर तय तिथि पर गांव में ही विवेक की सिमरन के साथ शादी होने लगती है।
विवेक मोहित को भी चार दिन पहले ही अपनी शादी का निमंत्रण पत्र दे गया था। उस दिन भी मोहित ने उसे कुछ नहीं कहा था। वह तो अपने उस कमिना इश्क को जिसने उससे उसका जिगरी दोस्त छीन लिया था उसे अब याद भी नहीं करना चाहता था।
शादी के दिन भी मोहित अपनी मां के साथ अपने खेत में काम कर रहा था। सुबह का समय था। दोनों मां बेटा कभी भूलकर भी अब आपस में विवेक और सिमरन के शादी की चर्चा नहीं करते थे।
दोनों मां बेटा अभी खेत में काम कर ही रहे थे कि विवेक के आदमी आकर मोहित को जबरदस्ती अपने साथ लेकर चले जाते हैं। मोहित शादी में कुछ हंगामा न खड़ा कर दे शायद इसीलिए विवेक ने ऐसा करवाया था। किसी को इस बारे में बताने पर मोहित को जान से मारने की धमकी भी उसकी मां को विवेक के आदमी जाते जाते दे जाते हैं।
मोहित जिस खेत में काम कर रहा था वह उसके घर के पास ही था। विवेक के आदमी उसकी मां को उसके घर ले जाकर एक कमरे में बंद कर देते हैं। बेचारी अपने बेटे की सलामती के लिए चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती है। वैसे भी विवेक के पिता या चाचा के डर से गांव में किसी की हिम्मत नहीं थी कि कोई उसकी मदद कर पाता।
शादी के बाद मोहित को घर वापस भेजने को बोलकर विवेक के भेजे हुए गुंडे उसे अपने साथ लेकर चले जाते हैं। मोहित चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता है।
उसी रात विवेक और सिमरन की शादी बड़ी ही धूम धाम से होती है।
गांव में एक तरफ विवेक की शादी में शहनाई की धुन बजते रहती है तो दुसरी तरफ मोहित के घर में उसकी दुखियारी विधवा मां की भगवान के आगे करुण पुकार गूंजते रहती है। एक कमीना दोस्त अपने ही बचपन के जिगरी दोस्त के अरमानों को रौंदकर उसकी हसरतों पर शहनाई बजा रहा था।
और अगले दिन सुबह में तो विवेक कमीनापन की सारी हदें पार ही कर जाता है। वह अपनी नई नवेली पत्नी सिमरन के साथ चमचमाती कार में सवार होकर मोहित के घर उसकी दुखियारी विधवा मां के जख्म को कुरेदने आ जाता है। उस समय तक उसके आदमी मोहित के घर का दरवाजा खोल चुके थे।
विवेक को सामने देखकर आखिरकार मोहित की मां का धैर्य जवाब दे ही जाता है। वह अपने मन की भड़ास विवेक पर निकालने लगती है।
मगर विवेक फिर भी मुस्कुराता हुआ सारी बाते सुनते रहता है।
तब तक बहुत सारे गांव वाले भी वहां आ जाते हैं। पीछे से विवेक के पिता एवं चाचा भी वहां आ जाते हैं। विवेक के पिता के साथ सिमरन के पिता भी रहते हैं।
सभी मोहित की मां के मुख से विवेक के लिए निकली बददुआओं को तमाशबीन बन सुनते रहते हैं।
मोहित की मां जैसे ही बोलना बंद करती है कि कार के अन्दर से सिमरन भी बाहर निकलती है, अभी तक सिर्फ विवेक ही कार से बाहर आया था।
सिमरन के साथ दुल्हा बना मोहित भी बाहर निकलता है। यह देख सभी की आंखें फटी की फटी रह जाती है। वास्तव में विवेक मोहित को किडनैप करवा कर अपने जगह पर उसी के साथ सिमरन की शादी करवाया था। शुरु से अभी तक विवेक सिर्फ सिमरन और मोहित की शादी करवाने के लिए ही ये सब नाटक करते आ रहा था। दोनों ने ऐसा इसीलिए किया था क्योंकि विवेक के चाचा और सिमरन के पिता ने मोहित को जान से मारने की पुरी योजना बना लिए थे। मगर विवेक और सिमरन को शादी के लिए राजी हो जाने पर दोनों ने मोहित को माफ कर दिया था। सिमरन और विवेक ने मिलकर ही यह सारा नाटक रचा था।
सच में आज एक बार इश्क कमीना होते होते बच गया था।
कुमार सरोज
Superb ��
जवाब देंहटाएंThanks 👍
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