दिल में ख्याल आता है / Dil Main Khyal Aata Hai । कविता । निधि नितिमा ।

                 दिल में ख्याल आता है 

                              निधि नितिमा 



तुम्हारी आंखों में हम अपनी दुनिया देखते हैं ,
पर मालूम है इसमें चाहत किसी और की है ।

बिल्कुल भी तमन्ना नहीं है मुझे तुम्हें पाने की ,
चाहना और चाहकर नहीं पाना मुमकिन नहीं है ।







यूं तो सब्र नहीं है जरा भी दिल को मगर खामोश है ,
सिर्फ़ तुम्हारी खुशी की खातिर ख़ामोशी को अपनाया है ।

मेरी जिंदगी में फक्त परछाई बसी है तेरी ,
 दिल को ठिकाना उन्हीं परछाइयों से मिला है ।

फिर इक मोड़ पर अजनबी हो गए हम दोनों ,
ख्वाहिशें बादल सी हैं बरस के बिखर जाना है । 

सिर्फ़ मैं ही हूं तुम्हारी शायद तुम नहीं हो मेरे ,
यही इक वजह रही कि हाथ छोड़कर चले गए मैं कुछ न कह पाई हूं ।

किसी के खातिर इन पलकों में आंसू नहीं ठहरे ,
फिर भी तुम्हारे तसव्वुर में कितनी बार पलके भिंगोए हैं ।

अंजान सी राहों में तकते रहे यूहीं कई बरस ,
शायद तुम कभी गुजरे तो आ जाओ कभी ।

 यूहीं ...... 
बस कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है ।

  
   
                          निधि नितिमा

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