जय जवान जय किसान / Jay Jawan Jay Kisan । कविता । कुमार सरोज ।

          जय जवान जय किसान

                              कुमार सरोज 



मैं हूं एक गरीब किसान ,

मेरा बेटा है दो जवान ,

मेरी बस एक ही है अरमान ,

एक सीमा पर जाएगा देने जान ,

एक हल लेकर बनेगा किसान । 






एक देश की रक्षा करेगा ,

एक देश को खिलाएगा खाना ,

मुझे गर्व होगा बेटे पर अपना ,

इक गोली सीने पर खाएगा ,

एक पसीना सबके लिए बहायेगा ।



मेरी बस एक ही है अरमान ,

इज्जत की रोटी चाहिए दो जून की ,

ताकि मरने पर भी फक्र करूं ,

एक का खून तो एक का पसीना ,

मिले माटी से तिलक करूं ।



मैं देश का नमक खाया हूं ,

बस देश का काम आ जाऊं ,

जय जवान जय किसान की ,

एक बुलंद आवाज बन जाऊं ,

मैं बस एक मिशाल बन जाऊं ।



मैं हूं एक गरीब किसान ,

मेरी बस यही है एक अरमान ।



                              कुमार सरोज 

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