हम हैं बेबाक बिहारी / Hum Hain Bebak Bihari ।। कविता ।। कुमार सरोज ।।

       हम हैं बेबाक बिहारी

                       कुमार सरोज 


 देश में राजनीति की बात हो,
 चाहे वतन के सुरक्षा की बारी।
हम अपनी जान हथेली पर रखकर,
हरदम सब में सबसे आगे रहते हैं,
काहे कि हम हैं बेबाक बिहारी।







भले बाहर वाले दिखावटी लोग हमें,
बुड़बक और जाहिल समझते हों।
मगर हमसे ज्यादा कोई पढ़ा लिखा,
या दिमाग वाला भी नहीं है यहां,
काहे कि हम हैं बेबाक बिहारी।


हम कोई फिलम या सीरियल नहीं बनाते हैं,
फिर भी हमसे ज्यादा कोई फिलमी नहीं है।
हम भूखे पेट और नंगे पांव भी रह लेते हैं,
 फिर भी हमसे ज्यादा कवनो फुटानी नहीं है।
काहे कि हम हैं बेबाक बिहारी।


हम झूट मूठ का दिखावा या ढोंग नहीं करते हैं,
इज्जत देते हैं और इज्जत की रोटी खाते हैं।
हम धर्म का चोला ओढ़कर पाखंड नहीं करते हैं,
फिर भी सभी धर्मों का विस्तार इसी माटी से हुआ है।
तबे तो हम हैं बेबाक बिहारी।


हमारे यहां कोई कल कारखाना या बड़ा मिल नहीं है,
फिर भी सबसे ज्यादा सभी के काम हमहीं आते हैं।
हम सारे कष्टों को सहते हुए नमक रोटी खा रह लेते हैं,
तवहीं हमरे मेहनत के दम पर ही सबकी पेट भरती है। 
काहे कि हम हैं बेबाक बिहारी।


हम सीधे साधे बिहारी भले हैं लेकिन मजबूर नहीं हैं,
आन पे बात आती है तो हम किसी से डरते भी नहीं हैं।
हम सीधे साधे, गंवार दिखने में सबको लगते जरुर हैं, 
फिर भी भारत की कौन कहे दुनिया में डंका बजाते हैं।
काहे कि हम हैं बेबाक बिहारी।

बुद्ध, अशोक, महावीर, आर्यभट सब तो इसी मिट्टी के थे,
राजेंद्र प्रसाद, वीर कुंवर सिंह जैसे कितने और यहीं के थे।
कई गौरव गाथा और बलिदानों से माटी भरी पड़ी है,
बस हम कहते नहीं करने में विश्वास हमेशा रखते हैं।

तबे तो भईया हम हैं बेबाक बिहारी।

                 
                        कुमार सरोज 

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