मिलन दिवस / Milan Divas ।। कविता ।। कुमार सरोज ।।
मिलन दिवस
कुमार सरोज
लोग जन्म दिवस - मरण दिवस,
शादी की सालगिरह दिवस,
और भी न जाने आजकल,
कौन कौन सा दिवस मनाते हैं।
आओ हम दोनों भी,
अपने पहली मिलन की,
जिस दिन से प्यार की शुरुआत हुई,
उस दिन को मिलन दिवस मनाते हैं।
सड़क किनारे खड़ी होकर तेरा,
बेसब्री से मेरा इंतजार करना,
मेरा भी तुझसे मिलने की बेताबी,
मगर बार बार ट्रैफिक में फंसना।
पहली मिलन - पहली दीदार,
हम दोनों का यूं तड़पना,
मुझे आज भी सब याद है,
उस हसीं लम्हें की हर एक बात।
हम दोनों का सड़क किनारे ही,
फुटपाट पर टहलते बाते करना,
चटपटे चाट और गोलगप्पे खाना,
चाय की प्याली बदल बदलकर पीना।
फुटपाट से ही तेरे लिए मेरा,
कान की बाली, नाक की नथिया,
और पैर की पायल खरीदकर,
पहली तोहफा के रुप में तुझे देना।
तुम्हारी दिया हुआ वो रुमाल,
जिस पर बने थे तेरे होठों पर,
लगे लिपिस्टिक के निशान,
मेरे पास आज भी सलामत है।
बस दुआ है मेरी रब से,
हम जहां भी रहे तेरी यादों को,
दिल में संजोए रखने की शक्ति दें,
और तुझे हमेशा खुश रखें।
आगे मिलन चाहे हो जितनी बार,
पहली मिलन की बात ही निराली है,
इसीलिए पहली मिलन की तिथि को,
आओ हम भी मिलन दिवस मनाते हैं।
कुमार सरोज
23 Jan. 2019
जवाब देंहटाएं14 dec 2017
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