मेरी चीख कोई कब सुनेगा / Meri Cheekh Koi Kab Sunega ।कहानी । कुमार सरोज ।

  मेरी चीख कोई कब सुनेगा
                       कुमार सरोज


                      शोभा अपने घर के मुख्य दरवाजे के पास खड़ी बार बार घर के अन्दर की ओर देखती हुई मोबाईल में समय देख रही थी। शोभा मां बनने वाली थी। उसे अपना चेकअप के लिए लेडी डॉक्टर शीतल प्रसाद से मिलने जाना था। डॉक्टर ने उसे सुबह के 11 बजे का ही समय दिया था। अभी वह डॉक्टर के पास ही जाने के लिए अपने पति पवन का इंतजार कर रही थी। 
                  पवन अभी तक अपने बेड रूम में जाने के लिए तैयार ही हो रहे थे। जबकि शोभा कब से तैयार होकर डॉक्टर के पास जाने के लिए दरवाजे के पास खड़ी थी। 

   " जल्दी चलिए न, 10 बज गया। एक बजे से पहले डॉक्टर से मिलकर आना भी होगा, नहीं तो कृति स्कूल से घर आ जायेगी, और फिर उसे घर के बाहर ही रहना पड़ेगा।  "
   
     शोभा अपने पति पर झल्लाते हुए बोलती है। 

 " चल रहें हैं मैडम जी, बस 2 मिनट और। वैसे तुमको डॉक्टर से मिलने की जल्दी नहीं है, बल्कि तुमको यह जानने की जल्दी है कि इस बार बेटा होगा की नहीं। "
   
     शोभा के पति पवन बेड रूम में शर्ट पहनते हुए बोले। 

     " ऐसा कुछ नहीं है। मेरे लिए बेटी भी बेटा के बराबर ही है। वैसे भी मेरी कृति किसी बेटा से कम है क्या ? "

       " अरे बाबा तुम तो नाराज हो गई। मैं मजाक कर रहा था। चलो अब डॉक्टर के पास चलते हैं। वैसे तुम्हारी सोच जैसी ही सोच अगर हर मां की हो जाए, तो अपने देश में लड़का और लड़की में ज्यादा अंतर ही नहीं रहेगा। " 

                    उसके बाद दोनों अपने घर में ताला लगाकर बाईक पर बैठकर डॉक्टर से मिलने के लिए चल पड़ते हैं। 







             पवन और शोभा की एक 8 साल की बेटी थी - कृति। कृति अभी स्कूल गई हुई थी। वह एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा तृतीय में पढ़ती थी। 
                 पवन अपनी पत्नी को डॉक्टर से दिखाकर 1 बजे के पहले ही वापस घर लौट आते हैं। डॉक्टर से मिलकर शोभा बहुत खुश थी। 
              शोभा घर आते ही सभी के लिए जल्दी जल्दी दोपहर का खाना बनाने लगती है। 
                  ठीक 1 बजे जिस समय घर प्रतिदिन कृति स्कूल से आती थी, उस दिन भी आ जाती है। मगर उस दिन वह अन्य दिनों की अपेक्षा बहुत उदास एवं डरी सहमी, खोई खोई सी दिख रही थी। जबकि प्रतिदिन उसे तो चुप रहने के लिए अपनी मम्मी से डांट सुनना पड़ता था। 
                   कृति स्कूल से आते ही किसी से बिना कुछ बोले अपने स्कूल बैग को धीरे से ड्रॉइंग रूम के सोफा पर रखकर चुपचाप अपने कमरे की ओर चली जाती है।
              कृति अपने कमरे में आकर धीरे से बेड पर लेट जाती है। वह लेटकर अपलक छत को निहारने लगती है। उसके चेहरे को देखने से ऐसा लग रहा था जैसे उसके दिलो दिमाग में कोई प्रचंड तूफान कहर बरपा रहा था। वह जोर जोर से चीखकर रोना तो तो चाह रही थी, मगर रो नहीं पा रही थी।   
                  कृति के पिता पवन उस समय हॉल में ही बैठे लैपटॉप पर कुछ लिखने में मग्न थे, जिसके कारण वो कृति की ओर ध्यान नहीं देते हैं। 
                कृति की मां शोभा भी उस समय किचेन में खाना बनाने में व्यस्त थी।
                 बहुत देर तक जब शोभा कृति की कोई आवाज नहीं सुनती है तो वह किचेन से ही बोल पड़ती है  - 
    
   " कृति, क्या बात है बेटा आज एकदम शांत हो। किसी फ्रेंड से स्कूल में झगड़ा की हो क्या ? "

       जवाब में शोभा को अपने पति की आवाज सुनाई देती है -  

   " कृति यहां है कहां। वह तो आते ही बैग रखकर अपने कमरे में चली गई। "

    पवन अपने लैपटॉप पर कुछ लिखते हुए ही बोले।

     " लग रहा है आज फिर वह अपनी बेस्ट फ्रेंड तनु से झगड़ा करके आई है। दोनों झगड़ती भी जल्दी है, और बिना एक दूसरे  से बात किए कभी रहती भी नहीं पाती है। अजब रिश्ता है दोनों का भी। "

      " बेचारी बच्ची है अभी। ये सब वो नहीं करेगी तो कौन करेगा ? तुम पहले जल्दी से खाना बनाओ। मेरे पेट में भी चूहे कूद रहे हैं। " 

   " खाना बन गया है। मैं कृति को देखकर आती हूं। " 

           शोभा बोलती हुई किचेन से निकलकर कृति के कमरे की ओर चली जाती है।

               उधर कृति अभी भी अपने कमरे में बेड पर मूर्तिवत लेटी छत की ओर अपलक देख रही थी। उसके शरीर में जरा सी भी हरकत नहीं हो रही थी। 
                 शोभा जब कृति के कमरे में प्रवेश करती है तो उसे इस तरह चुपचाप बेड पर लेती देख चौंक जाती है। आखिर वह एक मां थी, और एक मां तो अपने बच्चे के चेहरे को देखते ही उसके मन में क्या चल रहा है सब कुछ भांप लेती है। 
              वह झट कृति के पास आकर बैठ जाती है, एवं उसके सिर पर हाथ फेरने लगती है। वह कृति से उसके उदासी का कारण पुछने लगती है।
              कृति के शरीर में अपनी मां के स्पर्श से भी कोई हरकत नहीं होती है। वह पहले जैसे ही चुपचाप छत की ओर देख रही थी।

  " बेटा, बोलो न ... क्या हुआ ? "

                  शोभा के बातों का भी कृति के उपर कोई असर नहीं होता है। 
               शोभा अपनी बेटी की ऐसी हालात देख कर बेचैन हो उठती है। वह उसे अपने हाथों से पकड़ कर उठाने की कोशिश करने लगती है। मगर जैसे ही वह कृति को पकड़ती है कि वह जोर से चीख कर उठ बैठती है। उसका पुरा शरीर पसीना से भींग जाता है। वह चीखने के बाद हांफते हुए जोर जोर से सांस लेने लगती है।

 "  नहीं ................  । " 

              कृति इतनी जोर से चीखती है कि हॉल में बैठे उसके पिता भी उसकी आवाज सुनकर तुरंत दौड़े हुए वहां आ जाते हैं। 

         " क्या हुआ ......  कृति तो ठीक है न ? " 

        पवन कमरे में प्रवेश करते हुए पुछते हैं। 

               उधर तब तक कृति फिर से पहले जैसे ही शांत होकर बेड पर चुपचाप लेट जाती है। उसे देखकर अब ऐसा लग ही नहीं रहा था कि अभी वही चीखी थी। 

   " देखिए न यह कुछ बोल ही नहीं रही है। बस एक बार अभी चीखी और फिर शांत होकर चुपचाप लेट गई। " 
   
                 शोभा अपनी बेटी की हालत को देखकर अपनी आंसू नहीं रोक पाती है। वह सिसकती हुई अपने पति से बोली। 

                   पवन भी कृति के पास आकर उससे बात करने की कोशिश करने लगते हैं। 
                 दोनों में से किसी के बातों का कृति के उपर कोई असर नहीं होता है। वह चुपचाप खामोश कमरे के छत की ओर अपलक सिर्फ देखते रहती है। 

   " मैं इसके स्कूल में कॉल करके पुछता हुं। शायद वही कुछ हुआ होगा इसके साथ। " 
 
       पवन अपने पॉकेट से मोबाईल निकालते हुए बोले।

   " हां, स्कूल में ही कॉल करके पुछिए। " 
   
          शोभा कृति के सिर में तेल लगाती हुई बोली। 

                   कृति अभी भी शांत खामोश लेटी थी। उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे उसे कमरे में किसी के होने का जरा भी आभास नहीं हो रहा था। 
         उधर पवन जब स्कूल में कॉल करते हैं तो कोई कॉल रिसीव ही नहीं करता है। वो 4 - 5 बार कॉल करते हैं, मगर कोई कॉल रिसीव नहीं करता है।

   " स्कूल में तो कोई कॉल रिसीव ही नहीं कर रहा है। छुट्टी के बाद भी चपरासी तो स्कूल में ही रहता था। फिर पता नहीं कोई कॉल क्यों नहीं रिसीव कर रहा है ? " 

         अपने पति की बात सुनकर शोभा भी सोच में पड़ जाती है।

    " आप कृति की फ्रेंड तनु की मम्मी को कॉल कीजिए। मैं तनु से बात करती हूं। शायद उसे पता होगा।  " 

           पवन तनु की मम्मी मेधाना को कॉल करने लगते हैं।
               तनु कृति के ही स्कूल में कक्षा पंचम में पढ़ती थी। जिस कॉलेनी में कृति रहती थी उसी कॉलनी में तनु भी अपनी मम्मी मेघना के साथ रहती थी। उसके पापा सौरभ नेवी में नौकरी करते थे। इसीलिए तनु अपनी मम्मी के साथ यहां अकेली ही रहती थी। वह कृति से 2 साल बड़ी थी। फिर भी दोनों बहुत ही अच्छी दोस्त थी। 

                 पवन जब तनु की मम्मी मेघना से बात करते हैं तो उसकी बात सुनकर उनके पैरों तले की जमीन खिसक जाती है। 
                तनु अभी तक स्कूल से घर आई ही नहीं थी। वह तनु के आने का इंतजार करते करते थक हार कर अब उसके बारे में ही पता लगाने स्कूल जा रही थी।
              पवन जैसे ही शोभा को तनु की मम्मी से हुई बात को बताते हैं तो सुनकर वह भी चौंक जाती है। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये सब हो क्या रहा था ! 
                उस दिन पवन और शोभा पुरे दिन और पुरी रात सिर्फ कृति से बात करने एवं उसकी एक आवाज को सुनने की कोशिश में ही गुजार देते हैं। 
              दोनों के आंखों से नींद और भूख प्यास भी गायब हो गया था। 
                 कृति भी स्कूल से आकर जैसे बेड पर लेटी थी वैसे ही वह भी पूरी रात लेटी रह जाती है। उसके आंखों से भी नींद गायब थी। कभी सोने की कोशिश भी करती तो अचानक आंख बंद करते ही वह जोर से चीखती और फिर ऐसे शांत हो जाती जैसे कुछ अभी हुआ ही नहीं था।
                  पवन और शोभा ऐसी भयावह रात की कभी कल्पना भी नहीं किए थे। आज तक जिस बेटी को चुप कराने के लिए मां को पापा से शिकायत करने का डर दिखाकर चुप कराया जाता आ रहा था । आज उसी बेटी की एक शब्द सुनने के लिए दोनों रात भर व्याकुल होकर जागे हुए थे।
              भोर होते होते कृति की आंख लग जाती है। शायद उस मासूम बच्ची के दुख दर्द को देखकर नींद को थोड़ी दया आ गई थी।
                    कृति के सोते ही शोभा भी उसी के बगल में लेट जाती है।
               कुछ ही देर में सुबह होने वाली थी इसीलिए पवन वहां से हॉल में आकर सोफा पर बैठ जाते हैं।
              पवन को अभी तक कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर अचानक कृति को हो क्या गया था ? 
                      पवन कृति को लेकर परेशान व उसकी चुप्पी का कारण जानने के उधेड़बुन में फंसे हुए सोफा पर बैठे बैठे ही सुबह कर देते हैं।
              उनकी तंद्रा तो सुबह तब भंग होती है जब दरवाजे के बाहर से अखबार वाला उस दिन का अखबार अन्दर हॉल में दरवाजे के नीचे से फेंकता है। अखबार उनके पैर के पास आकर ही रूकती है। 
            पवन अभी भी सोच में डूबे हुए ही थे कि अचानक अखबार के प्रथम पृष्ठ पर छपे एक खबर पर जैसे ही उनकी नजर पड़ती है कि उसे पढ़कर वो चौंक जाते हैं।
                       कृति की बेस्ट फ्रेंड तनु के बारे में अखबार में खबर छपी थी। 

     अखबार में हेड लाइन था - 

" एक निजी विद्यालय के पांचवी कक्षा की छात्रा की लाश उसके स्कूल के बाथरूम में मिली। रेप की संभावना। " 

                तनु के बारे में खबर देख पवन झट से अपने हाथ में अखबार लेकर एक ही सांस में पुरी खबर पढ़ डालते हैं। 
                खबर को पढ़कर वो सन्न रह जाते हैं। स्कूल में ही तनु जैसी मासूम बच्ची के साथ ऐसा घिनौना काम आखिर कर कौन सकता था ? क्या आज के इस जालिम, बेहया, एवं निर्लज समाज में अब मासूम बच्ची भी कहीं सुरक्षित नहीं थी ? 
            पवन तनु के बारे में अखबार में छपे खबर को पढ़ते ही कृति के दिलो दिमाग में मचे उथल पुथल के बारे में पुरी बात समझ जाते हैं। कृति जरूर तनु के साथ हुई घटना को नजदीक से देखी होगी। तभी तो उसके मन मस्तिष्क में उस जघन्य कृत्य की छवि चलचित्र के भांति ऐसे बैठ गई थी वह उसे जीते जी एक लाश ही बनाकर रख दिया था।  
                 पवन को समाज में छिपे ऐसे दरिंदों जिसके कारण आज तनु जैसी मासूम बच्ची को अथाह पीड़ा झेलते हुए असमय मौत के आगोश में समाना पड़ा था, एवं कृति जैसी चंचल लड़की को भी आज घूंट घूंट कर जीने को विवश होना पड़ रहा था, पर अंदर ही अंदर बहुत गुस्सा आने लगता है। 
                  पवन अभी मन ही मन क्रोधित होते हुए हाथ में अखबार लिए सोच में डूबे ही थे कि कृति के कमरे से निकलकर शोभा भी वहां आ जाती है। 
              अपने पति के क्रोधित सुर्ख लाल चेहरे को देखकर वह चौंक जाती है।

   " क्या हुआ, आप इतने गुस्से में क्यों लग रहे हैं ? "

                     पवन अपनी पत्नी के सवालों का कोई जवाब नहीं देते हैं। सिर्फ उसे धीरे से अखबार दे देते हैं।
               शोभा भी जैसे ही अखबार के पहले पन्ना पर ही तनु वाली खबर देखती है तो उसके भी होश उड़ जाते हैं। वह जल्दी से एक ही सांस में पुरी खबर पढ़ने लगती है। मगर वह पुरी ख़बर पढ़ नहीं पाती है। वह पढ़ते पढ़ते ही सिर पकड़कर वही फर्श पर बैठ जाती है - 

   " हे भगवान ! यह कैसा समय आ गया है ? अब स्कूल में भी हमारी मासूम बेटीयां सुरक्षित नहीं है। पता नहीं तनु की मां पर क्या बीत रही होगी ! "

             पवन अपनी पत्नी शोभा को फर्श पर से उठाकर सोफा पर बैठा देते हैं। 
              उसके बाद दोनों पति पत्नी समाज के अंदर छिपे ऐसी नीच और घिनौनी मानसिकता वाले दरिंदों पर अपनी मन की भड़ास आपस में बात चित करते हुए निकालने लगते हैं।
                 मासूम बच्चियों एवं अवलाओ के साथ आए दिन हो रहे रेप और बलात्कार जैसी जघन्य घटनाओं पर दोनों बहुत देर तक आपस में बातें करते रहते हैं। 
                  दोनों को आपस में बातें करते करते सुबह के 10 बज जाते हैं। अभी तक किसी ने कल दोपहर से ही खाना तो दूर एक बूंद पानी भी नहीं पीया था। 
              इस बीच एक दो बार शोभा कृति के कमरे में जाकर उसे देख भी आई थी। वह अभी तक सो रही थी।
             पवन आज के अख़बार जिसमें तनु के साथ घटित घटना की खबर छपी थी उसे फाड़ कर डस्टबिन में डाल देते हैं। ताकि कृति जब उठे तो उसकी नजर तनु के खबर पर नहीं जाए।
                   दोनों अभी हॉल में बैठे आपस में बातें करते ही रहते हैं कि अचानक जोर से एक बार फ़िर से कृति के चीखने की आवाज उसके कमरे से आती है। 
              आवाज सुनते ही दोनों कमरे की ओर दौड़ पड़ते हैं।
               जब दोनों कमरे में पहुंचते हैं तो उस समय कृति  बेड पर लेटी जोर जोर से हांफ रही थी। उसका पुरा शरीर पसीना से भींगा हुआ था।
                एक मां और एक बाप का दिल अपनी बेटी को तिल तिलकर यूं तड़पते देख दहल उठता है। 
                  इधर कृति के मन मस्तिष्क में उसके देखे हुए दृश्य उसे ऐसे बार बार याद आ रहे थे कि वह चाहकर भी कुछ भूल नहीं पा रही थी। वह जोर जोर से रोना और चीखना चाह रही थी, मगर डर के मारे उसकी आवाज नहीं निकल रही थी। 
             शायद यह कृति की ऐसी अनसुनी चीख थी, जिसे कोई सुन नहीं पा रहा था। कृति की खामोशी उसे अंदर ही अंदर तिल तिल कर मौत की ओर धकेलते जा रही थी।                          पवन कृति को तुरंत अपने कांधे पर उठाकर डॉक्टर से दिखाने के लिए कमरे से बाहर की ओर तेजी से चल पड़ते हैं। 
                पीछे से शोभा भी रोती हुई चल पड़ती है। 
                   आज कृति जैसी न जाने कितनी ऐसी मासूम लड़कियां थी, जो जीते जी तिल तिल कर मरने को विवश थी। उसकी चीख को कोई नहीं सुन पा रहा था। सभी आज बहरे और गूंगे बने हुए थे। तभी तो देश की बेटियों के साथ आज रेप और बलात्कार जैसी जघन्य घटनाएं घटने के सिवाय और बढ़ते ही जा रहे थे। 
                 हे भगवान, आखिर इन मासूम अबलाओ की चीख को कोई कब सुनेगा ? 

                            कुमार सरोज 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

आपके बहुमूल्य टिप्पणी एवं सुझाव का स्वागत है 🙏

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अधूरी यात्रा /। Adhoori Yaatra । हिमांशु कुमार शंकर ।

उसकी मां / Usaki Maa । कहानी । कुमार सरोज ।

लव डे / Love Day । गजल । कुमार सरोज ।