मेरी चाहत / Meri Chahat ।। गजल ।। कुमार सरोज ।।
मेरी चाहत
कुमार सरोज
मेरी चाहत किसी के गवाही का मोहताज नहीं,
तुझे मैंने प्यार किया है किसी से पुछ कर नहीं।
तुझे रूठना है तुम रूठो पर मेरे प्यार पे शक न करो,
मेरे दिल की हर धड़कन में बस तुम ही तुम बसी हो।
माना की मैंने अनजाने में तेरा दिल बहुत दुखाया है,
पर पीछे की वजह भी तो तुमने कभी जाना नहीं है।
शायद प्यार का भाव आज पैसा के आगे फीका हो गया,
तभी तो मेरे प्यार को भी तूने पैसा से मोल लगा दिया।
इसमें कसूर सिर्फ तेरा नहीं जमाने का ही ज्यादा है,
लोग अब प्यार को भी प्यार नहीं सौदा समझ बैठे हैं।
मेरी चाहत न ही कल कम थी न ही आज कम है,
हम दोनों के सोच में ही कोई अब नुक्स आ गया है।
कुमार सरोज
लाजवाब
जवाब देंहटाएंजी धन्यवाद
हटाएंबहुत अच्छा
जवाब देंहटाएंजी धन्यवाद
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