मेरे कौन हो तुम / Mere Kaun Ho Tum ।। गजल ।। कुमार सरोज ।।

        मेरे कौन हो तुम
                   
                      कुमार सरोज 




मेरे दिल के धड़कन की धक धक आवाज हो तुम, 
नस नस में बह रहे खून का हरेक कतरा हो तुम,
मैं जो सांस लेता हूं वो निर्मल शुद्ध हवा हो तुम।
दुबारा कभी तू मत पूछना कि मेरे कौन हो तुम।







मेरी जिंदगी का अटूट स्थाई पासवर्ड हो तुम,
न मिटने वाली दिल में अंकित गजल हो तुम,
सोते जागते आंखों में बसी प्यारी तस्वीर हो तुम, 
दुबारा कभी तू मत पूछना कि मेरे कौन हो तुम।


पास नहीं हो फिर भी दिल के सबसे करीब हो तुम,
मेरी कोई अपनी नहीं हो फिर भी सबसे खास हो तुम,
भूल से भी भूल न पाऊं वो अमिट याद हो तुम,
दुबारा कभी तू मत पूछना कि मेरे कौन हो तुम।


मेरी लेखनी की लिखी हुई हरेक शब्द हो तुम,
मेरी प्रेरणा मेरी हिम्मत मेरी खुशी की वजह हो तुम,
तुम्हें कैसे यकीं दिलाऊं मेरी ख़्वाब की मल्लिका हो तुम,
दुबारा कभी तू मत पूछना कि मेरे कौन हो तुम।


                        कुमार सरोज

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