नेता बनने का दिल करता है / Neta Banane Ka Dil Karta Hai ।। कविता ।। कुमार सरोज ।।

नेता बनने का दिल करता है 

                     कुमार सरोज


नेता बनने का दिल करता है - 
मगर क्या करूं 
मैं किसी बड़े जाति का हूं नहीं,
मैं करप्ट या क्रिमिनल भी हूं नहीं,
मेरे पास ज्यादा पैसा भी तो है नहीं।


नेता बनने का दिल करता है - 
मगर क्या करूं 
मुझे ज्यादा झूठ बोलने आता है नहीं,
मैं अपनी बेइज्जती सह पाता हूं नहीं,
मैं अपना जमीर भी बेच पाता हूं नहीं।

नेता बनने का दिल करता है -
मगर क्या करूं
किसी की चापलूसी करनी आती है नहीं,
किसी का झोला भी टांग सकता हूं नहीं,
मेरे खानदान में भी कोई नेता तो थे ही नहीं।

नेता बनने का दिल करता है - 
मगर क्या करूं। 

              
                     कुमार सरोज

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