किन्नरों के लिए संघर्षरत भरत कौशिक / Kinnaron Ke Liye Sangharshrat Bharat Kaushik ।। बिहार कृति कथा ।।
किन्नरों के लिए हमेशा संघर्षरत भरत कौशिक
आज बिहार में समाजिक कार्य के नाम पर बहुत सारी संस्थाएं एवं समितियां सिर्फ बनकर कागजों एवं ऑफिस के फाइलों की शोभा बढ़ा रही हैं। लेकिन काम कुछ हो नहीं रहा है, सिर्फ दिखावे और अपना पेट भरने में सब लगे हैं।
मगर आज हम बात करने जा रहे हैं बिहार के एक ऐसे सामाजिक एवं सच्चे कार्यकर्ता की जो अपने दम पर सामाजिक कार्य तो कर ही रहे हैं, साथ ही साथ किन्नरों के लिए सामाजिक सुविधा एवं उसको उसका हक दिलाने के लिए अपनी पुरी जिंदगी भी लगाने को संकल्पित हैं।
उस समाजिक कार्यकर्ता का नाम है भरत कौशिक। इनका जन्म बिहार राज्य के पटना जिला में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ है। इनकी पढ़ाई पटना विश्विद्यालय के समाजशास्त्र सामाजिक कार्य विभाग से पूरी हुई है।
भरत कौशिक के पारिवारिक पृष्टभूमि को देखे तो सामाजिक कार्य की ओर पूरे परिवार का ध्यान ज्यादा था। किसी को मदद करना, किसी को हॉस्पिटल पहुँचना जैसे ये हमेशा करते रहते हैं। ये किसी का कोई भी काम एवं समाज के लोगों को मदद पहुँचने मे तनिक भी देरी नही करते हैं।
अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढाई पुरी करने के बाद से ही ये सामाजिक कार्य में लग गये हैं।
विगत कुछ वर्षों से ये किन्नर समुदाय के उत्थान एवं उनके हक के लिए दिन रात प्रयासरत हैं। जब ये किन्नरों और किन्नर समुदाय की लोगों से मिले तो एक भयानक दर्द औऱ उनके शोषण को देखकर इनसे रहा नहीं गया। किन्नरों के जीवन का संघर्ष इनकी आँखों की सामने नाचने लगा, जिन्हें समाज मे आज भी स्वीकार नहीं किया था। इन्हें आज के इस आधुनिक युग में भी सबों का देखने का नजरिया नहीं बदल था। इन्हीं सब बातों ने भरत कौशिक के मन और मस्तिक को झकझोर कर रख दिया।
आज मानव जाति में ही एक मानव के साथ इतना भेदभाव क्यों हो रहा था ? शायद किसी को समझ में नहीं आ रहा था।
वे कहते है - " हमने ये प्रण किया कि किन्नरों को उनके अधिकारों और उनकी समानता की लडाई तब तक लड़ते रहेंगे जब तक इन सब को उनका हक मिल नहीं पाता है। "
भरत कौशिक आज समाज के द्वारा किन्नरों के शोषण को चलचित्र एवं नाटकों के माध्यम से लोगों के बीच लाने का काम लगातार कर रहे हैं। वे उनहें शोषण मुक्त और समाज मे सम्मान दिलवाने के काम भी लगातार कर रहे हैं।
भरत कौशिक बताते हैं कि पिछले वर्ष वे ट्रांसजेंडर मॉडल मैगज़ीन 2017 का निर्माण भी किए हैं जो की एक डिजिटल मैगज़ीन हैं। उस मैगज़ीन में वे लगातार किन्नर समुदाय के सदस्यों जो कि अपने संमाज के रोल मॉडल हैं उनके बारे मे पोस्ट करते हैं।
वे बताते हैं कि ट्रांसजेंडर समुदाय दुनिया का सबसे ज्यादा शोषित समुदाय है। ट्रांसजेंडर का शोषण अपने परिवार से ही शुरू हो जाता है। उनको हेय दृष्टि से देखा जाता है। उनके साथ भेद भाव भी आम बात है। मजबूरन उन्हें घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ता है।
किन्नर समाज के प्रति हमारा समाज इतना बर्बर हो गया है कि आज उनके साथ आये दिन मार पीट हत्या आम बात हो गई है।
किन्नर समाज को लोगों के द्वारा आज भी सम्मान नही मिलता नहीं। उन्हें अच्छे घर और दंग का काम भी नहीं मिलता है। इसीलिए मजबूरन उन्हें ट्रेन में भीख और समाज के घृणित और बहिस्कृत काम अपने जीविका के लिए करने पड़ते हैं। जिसे उनकी सुरक्षा और स्वस्थ दोनों पे ख़तरा बना रहता है।
इन सभी चीजों को देखते हुये ही भरत कौशिक ने ट्रांसजेंडर मॉडल मैगजीन 2017 का स्थापना किया है। आज राज्य, देश और विदेश से ट्रांजेण्डेर उस मैगजीन मे अपनी तस्वीरों को पोस्ट कर अपने बारे में लिख रहे हैं। इस मैगजीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है ।
भरत कौशिक जो जेंडर एक्टिविस्ट है और हमेशा बिहार मे ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार को और उनके मदद की लिए तैयार रहते हैं, वो बताते है कि मैगजीन का उद्देश्य किन्नर समुदाय को समाज में सम्मान और सम्मानित काम मिले, एवं उनको पहचान दिलाने के लिये बनाया गया है।
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