डर / Daar ।। कहानी ।। कुमार सरोज ।।
डर
कुमार सरोज
पटना से ठीक सटे एक शहर है दानापुर। मगर अब यह पटना का ही एक हिस्सा बन गया है। पटना की आबादी बहुत बढ़ गई थी, जिसके कारण लोग अब दानापुर में ही ज्यादा बसने लगे थे। अच्छे स्कूल भी उसी एरिया में खुल गए थे। वैसे दानापुर आर्मी छावनी के लिए ज्यादा प्रसिद था। यहां अंग्रेजों के समय में ही आर्मी छावनी था।
दानापुर आर्मी छावनी से कुछ ही दूरी पर है सगुना मोड़। दानापुर पुर का सबसे पॉश इलाका।
सुबह का समय था। सगुना मोड़ के पास सड़क किनारे एक जगह पर बहुत सारे बच्चे स्कूल ड्रेस में अपने अभिभावक के साथ स्कूल बस के इंतजार में खड़े थे। उन्हीं स्कूली बच्चों में एक 10 साल की बच्ची शालिनी भी अपनी बुआ भावना के साथ खड़ी थी। चंचलता उसके चेहरे से ही साफ झलक रही थी।
आज शालिनी का जन्म दिन था। इसीलिए वह अभी वहां पर खड़े सभी को चॉकलेट बांट रही थी। सभी उसे बधाइयां दे रहे थे। वह आज बहुत खुश दिखाई दे रही थी।
शालिनी अपने क्लास के दोस्तो में भी बांटने के लिए चॉकलेट अपने बैग में रखे हुए थी।
शालिनी की बुआ भावना 22 साल की थी। वह इसी वर्ष स्नातक पास की थी और अब अपनी भाभी नीलम के साथ ही रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती थी, एवं भाभी के साथ घर के कामों में उनकी हाथ भी बटाती थी।
दानापुर में भावना का अपना घर नहीं था। उसकी भाभी सिर्फ शालिनी को पढ़ने के लिए ही किराए के घर में रहती थी। भावना के भईया आर्मी में नौकरी करते थे। वे 4 साल पहले ही बॉर्डर पर शहीद हो गए थे। इसीलिए भावना की विधवा भाभी आर्मी छावनी के पास ही किराए के घर में रहती थी। गांव में भावना के माता पिता अकेले रहते थे। सभी शालिनी के पापा के मर जाने के बाद बहुत मुश्किल से अब धीरे धीरे उबर पाए थे।
शालिनी सभी को जैसे ही चॉकलेट बांटकर फ्री होती है कि उसकी स्कूल बस आ जाती है। वह अपनी बुआ को बाय बाय बोलती हुई बस में सवार होकर चली जाती है।
शालिनी के जाने के बाद भावना भी वहां से अपने किराए के घर की ओर चल पड़ती है। वहां से उसका घर 500 मीटर दूर था।
भावना शालिनी के लिए आज उसके मनपसंद पकवान बनाने के बारे में सोचती हुई अपने घर की ओर बढ़ी चली ही जा रही थी कि उसी मोहल्ले में रहने वाले कुछ लड़के गली के नुक्कड़ पर बैठे उसे देखकर उस पर गंदी गंदी फब्तियां कसने लगते हैं।
यह उन लड़कों का रोज का काम था। बोलने पर उलटे यही लोग घर में जाकर गाली गलौज करने लगते थे। पुरा मोहल्ला इन लड़कों के करतूत से परेशान था। पुलिस भी किसी को कभी कुछ नहीं करती थी, क्योंकि उन लड़कों में से एक स्थानीय विधायक के बेटे का दोस्त था।
शुरू में भावना इन लफंगे लड़को का विरोध की थी, मगर सभी उलटे उसके किराए के घर पर जाकर भाभी के समाने ही बहुत गाली गलौज, एवं उठाकर ले जाने की धमकी भी दिया था। तब से वह प्रतिदिन चुपचाप सिर्फ सभी की बातों को सुनकर अनसुना करके वहां से आती जाती थी। भावना की भाभी भी उसे सभी से दुर ही रहने को बार बार सलाह देती थी।
इन लफंगे लड़को के डर से ही भावना या उसकी भाभी शाम के बाद घर से बाहर नहीं निकलती थी। एक तो घर में कोई पुरुष था नहीं, और उपर से भावना जवान एवं सुंदर थी।
भावना के जैसी ही उस मोहल्ले में और भी बहुत सी लड़कियां थी, जो इन लड़कों के गंदे एवं अश्लील हरकतो से परेशान थी। कुछ ने तो वह मोहल्ला ही छोड़ दिया था। मगर कुछ यह सोच कर रह रही थी कि आज लगभग सभी जगहों पर तो कमोबेस यही हाल था।
भावना जब घर पहुंचती है तो उस समय उसकी भाभी मटर छीमी से मटर के दाने निकाल रही थी। आज शालिनी का जन्म दिन था, जिसके कारण उसका मनपसंद खाना मटर पनीर, पूड़ी और सूजी का हलवा खाने में बनाना था। भावना भी भाभी के साथ काम में लग जाती है।
केक, मिठाई और उसके बाद खाना बनाते बनाते शालिनी के स्कूल से वापस आने का समय हो जाता है। आज समय का किसी को पता ही नहीं चलता है। भावना की नजर जब दीवार घड़ी पर पड़ती है तो वह तुरंत शालिनी को बस स्टॉप से लाने के लिए जाने लगती है। मगर उसकी भाभी उसे मना कर देती है, क्योंकि काम में व्यस्त रहने के कारण भावना भी अभी तक नहाई नहीं थी। वैसे भी वह स्कूल से वापस आते समय कॉलेनी के और दूसरे बच्चों के साथ घर आ जाती थी।
भावना शालिनी के घर आने से पहले तैयार हो जाना चाहती थी, इसीलिए वह नहाने के लिए बाथरूम में चली जाती है।
भावना जब बाथरूम से नहाकर बाहर निकलती है तो उस समय तक घर में शालिनी को नहीं देख अपनी भाभी से उसके बारे में पूछ बैठती है -
" भाभी शालिनी अभी तक स्कूल से वापस नहीं आई है क्या ? "
" आज उसका बर्थडे है तो रास्ते में फ्रेंड के साथ गप्पे लगाती हुई धीरे धीरे आ रही होगी। तुम उसकी फिकर मत करो, वो आ जायेगी। "
नीलम कपड़े पर स्त्री करती हुई बोली।
भावना अपनी भाभी की बात सुनकर बेडरूम में तैयार होने चली जाती है।
धीरे धीरे समय बीतता रहता है। एक घंटा से उपर हो जाता है, मगर शालिनी अभी तक घर स्कूल से वापस नहीं आई थी। अब भावना और उसकी भाभी के मन में शंका के बीज पनपने लगते हैं। क्योंकि अब तक तो शालिनी को घर हर हाल में आ जाना चाहिए था।
" भाभी, बहुत देर हो गया, मैं जाकर देखती हूं। "
भावना से जब रहा नहीं गया तो वह बोली।
" ठीक है, जाओ। मिलने पर सबसे पहले उसे 2 - 3 थप्पड़ लगाना। बर्थडे के नाम पर कोई इतना भी केयरलेस होता है क्या । "
नीलम घड़ी देखती हुई मां के गुस्से वाले प्यार से बोली।
भावना भाभी की बात सुनते ही तेजी से बाहर की ओर चल देती है। शाम के 3 बज गए थे। जबकि शालिनी 2 बजे तक घर आ जाती थी।
भावना घर से लेकर सगुना मोड़ तक पुरे रास्ते इधर उधर देखती हुई आ जाती है, मगर शालिनी कहीं नजर नहीं आती है। पता नहीं क्यों कुछ सोचकर उसका दिल धड़कने लगता है। उसके मन में बार बार बुरे ख्याल आने लगते हैं।
भावना सगुना मोड़ से उदास वापस अपने घर की ओर लौट पड़ती है।
भावना जिस मोहल्ले में रहती थी, उसी मोहल्ले के शालिनी के साथ पढ़ने वाले 3 - 4 बच्चों को जानती थी। वह उन्हीं सभी से मिलने के लिए उनके घरों की ओर चल पड़ती है।
भावना शालिनी के सभी फ्रेंड से मिलती है। सभी लगभग एक ही बात उसे बताते हैं। उन सभी के अनुसार किसी ने शालिनी को बस में ही नहीं देखा था। जिस बस से वह स्कूल आती जाती थी उस बस में वह बैठी ही नहीं थी। शायद उसका बर्थडे था, इसीलिए छुट्टी के बाद और दूसरे बच्चों को चॉकलेट बांटने में लेट हो गया होगा, और स्कूल बस खुल गई होगी। बस का ड्राइवर या कंडक्टर ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया था।
सभी से बातें करने के बाद भावना के पैर तले की जमीन खिसक जाती है। उसका दिल दिल जोर जोर से धड़कने लगता है।
भावना तुरंत घर आकर अपनी भाभी को सारी बाते बताती है। सुनकर नीलम के भी होश उड़ जाते हैं। जब शालिनी बस में ही नहीं बैठी थी तो वह फिर गई कहां ?
नीलम तुरंत स्कूल में कॉल करती है। मगर वहां से उसे जो जवाब मिलता है उसे सुनकर तो उसके होश ही उड़ जाते हैं। शालिनी छुट्टी के बाद बच्चों को चॉकलेट बांट कर स्कूल बस में बैठने उसी ओर स्कूल से गई थी।
किसी आशंका से भावना और उसकी भाभी नीलम का दिल tजोर जोर से धड़कने लगता है। दोनों को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर शालिनी गई तो कहां गई ?
कुछ ही देर के बाद स्कूल से कॉल आता है कि शालिनी तो बस में बैठी ही नहीं थी।
सुनकर दोनों और चिंतित हो जाते हैं। आखिर शालिनी जब स्कूल से बस में सवार होने के लिए निकली थी तो फिर बस में बैठी क्यों नहीं थी ?
नीलम और भावना किसी अनहोनी की आशंका से भयभीत होकर तुरंत स्थानीय थाना में जाकर थानेदार मेहता को सारी बात बताती है।
थानेदार मेहता दोनों से पुरी बात सुनकर तुरंत स्कूल की ओर चल पड़ते हैं। वहां से शालिनी का स्कूल 4 किलोमीटर दूर था।
थाना से भावना भी अपनी भाभी के साथ घर आ जाती है। तब तक शाम के 6 बज चुके थे। दोनों का मन किसी अनहोनी की आशंका से अब और ज्यादा विचलित होने लगा था।
घर आने के बाद नीलम बार बार थाने और स्कूल में कॉल कर कर के अपनी बेटी के बारे में पुछ रही थी, मगर कहीं से कोई उचित जवाब नहीं मिल रहा था।
भावना भी शालिनी के फ्रेंड के यहां बार बार कॉल करके पुछ रही थी। मगर शालिनी के बारे में कहीं से कुछ पता नहीं चल रहा था।
धीरे धीरे शाम और फिर उसके बाद रात हो चली थी। जैसे जैसे रात अंधेरे के आगोश में सिमटते जा रही थी, वैसे वैसे दोनों की बैचैनी और बढ़ती जा रही थी। अब तो दोनों मोहल्ले के लफंगों के डर से घर से भी बाहर शालिनी का पता लगाने नहीं निकल सकती थी।
उस रात भावना और उसकी भाभी के लिए कयामत की रात थी। शालिनी के जन्म दिन की सारी तैयारी धरी की धरी रह गई थी। अभी तक दोनों ने दोपहर के बाद से एक बूंद पानी भी नहीं पीया था। जैसे जैसे रात बीत रही थी, दोनों की चिंताएं और बढ़ती जा रही थी।
दोनों ने पुरी रात जाग कर भगवान से शालिनी की सलामती के लिए प्रार्थना करते करते ही बीता दी थी। नीलम रात भर अपने मोबाईल और घर के दरवाजे की ओर ही टकटकी लगाए थी, कि कब शालिनी का कुछ पता चल जाए।
सुबह सूरज निकलकर अभी अपनी लालिमा बिखेरे हुए ही था कि तभी थाना से थानेदार मेहता का कॉल नीलम के मोबाईल पर आता है।
नीलम झट से कॉल रिसीव करती है। थानेदार मेहता नीलम को जो बात बताते हैं उसे सुनकर वह सन्न रह जाती है।
जिस स्कूल में शालिनी पढ़ती थी, ठीक उसके पीछे ही झाड़ियों में उसकी लाश मिली थी। उस नन्हीं सी बच्ची को जिसने अभी घर से बाहरी दुनिया में कदम ही रखी थी को किसी ने बलात्कार करके जान से मार दिया था।
थानेदार की बात सुनते ही नीलम और भावना बदहवास चीखती चिल्लाती थाने की ओर उसी अवस्था में दौड़ पड़ती है।
कितना बदल गया था आज के इन्सान की इंसानियत, और उसकी मानवता। उस निरीह इंसान को 10 साल की एक मासूम बच्ची का भी जरा ख्याल नहीं आया था।
आखिर आज का सभ्य पुरुष प्रधान समाज अपने आप को किस दिशा में लेकर जा रहा था ?
शालिनी कोई पहली मासूम नन्हीं बच्ची नहीं थी। अब तो आए दिन देश के किसी न किसी कोने में इस तरह के कृत्य देखने सुनने को मिल जा रहे5 थे। आज आलम यह था कि देश की बच्चियां हर जगह पर अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगी थी।
थाना से वापस आने के बाद से ही शालिनी की मां नीलम एकदम गुमसुम, खामोश हो गई थी। वह चुपचाप बैठी सिर्फ शून्य में निहार रही थी। भावना भी चुपचाप अपनी भाभी के पास ही बैठी थी।
नीलम कुछ देर वैसे ही बैठी रहती है, जिसके बाद वह अचानक एक तरफ़ लुढ़क कर बेहोश हो जा रही थी। किसी तरह भावना अपनी भाभी को होश में लाती है।
उसके बाद तो नीलम का बेहोश होने का यह सिलसिला लगातार शुरू ही हो जाता है।
पहले तो भावना खुद ही एक दो बार किसी तरह भाभी को होश में लाती है। मगर जब बार बार ऐसा होने लगता है तो वह सगुना मोड़ के पास के एक डॉक्टर को बुलाने के लिए घर से चल पड़ती है।
सगुना मोड़ के पास ही डॉक्टर राजेंद्र सिंह का एक छोटा सा क्लिनिक था। वे जरुरत पड़ने पर किसी के घर पर भी जाकर रोगी को देखते थे।
भावना डॉक्टर सिंह को ही बुलाकर अपने घर लाती है एवं भाभी को दिखाती है।
डॉक्टर सिंह नीलम को अपने पास से ही कुछ दवाइयां देकर वापस चले जाते हैं।
नीलम या भावना ने कल दोपहर से ही कुछ खाया पीया नहीं था। अब भावना का मन भी खूब रोने को कर रहा था, मगर भाभी की हालत को देखकर वह बस अन्दर ही अन्दर खून की घूंट पीकर अपने आप को किसी तरह संभाले हुए थी।
उधर स्कूल वालों ने अपना फर्ज निभाने के बहाने शालिनी को इंसाफ दिलाने के लिए जुलूस निकालना शुरू कर दिया था।
पुलिस ने भी आनन फानन में स्कूल के ही एक स्टाफ को गिरफ्तार कर लिया था।
जब से डॉक्टर नीलम को दवा देकर गया था, तब से वह दवा खाने के बाद से ठीक थी। मगर अभी तक वह कुछ खाना नहीं खाई थी। जबकि अब शाम हो गई थी।
अभी भावना अपनी भाभी को कुछ खाने के लिए समझाने एवं मनाने में लगी थी। मगर उसकी भाभी अभी भी पहले के जैसे ही मौन खामोश खोई खोई बैठी थी। उसके आंखों से आंसू तो अब निकलना ही बंद हो गया था। ऐसा लग रहा था मानो आखों के सारे आंसू सूख गए थे।
भावना अभी अपनी भाभी को थोड़ा बहुत भी खाने के लिए मिन्नते कर ही रही थी कि वह अचानक फिर से बेहोश होकर एक तरफ़ लुढ़क जाती है।
किसी तरह भावना उसे फिर से होश में लाती है। नीलम होश में तो आ जाती है, मगर कुछ ही देर के बाद फिर से वह बेहोश हो जाती है।
अपनी भाभी की फिर से तबीयत बिगड़ते देख भावना सहम जाती है। वह फिर से डॉक्टर सिंह को बुलाने के लिए जाना ही चाहती है, कि उसकी भाभी उसके हाथ पकड़कर रोक लेती है -
" बाहर अंधेरा हो गया है, तुम अब मत जाओ। मोहल्ले के लड़के तुम्हारी भी इज्जत लुटकर तुम्हें जान से मार देंगे। "
नीलम के कहे शब्दों में डर और बेवसी साफ झलक रहा था।
भावना अपनी भाभी के बातों को सुनकर कुछ नहीं बोल पाती है। उसके अन्दर भी तो भाभी वाला ही डर समाहित था ही। वह चुपचाप उदास कुछ सोचती अपनी भाभी के पास ही बैठ जाती है।
क्या सच में आज देश की बहन, बेटियां एवं महिलाओं में अपने समाज से ही इतना डर बैठ गया था कि वो अब हर जगह अपने आप को असुरक्षित ही महसूस करने लगी थी।
उस रात भावना को पता नहीं कब नींद आ जाती है। जब वह उठती है तो सुबह हो गई थी। वह भी जमीन पर ही भाभी के पास ही बैठी बैठी सो गई थी।
भावना जब जगती है तो देखती है कि उसकी भाभी भी बगल में ही जमीन पर लेटी सो रही है। उसके शरीर पर के सभी कपड़े अस्त व्यस्त थे।
भावना जब अपनी भाभी के कपड़े ठीक करने लगती है तो उनके शरीर का स्पर्श होते ही वह सन्न रह जाती है। उसकी भाभी मरी पड़ी थी।
डर ने भावना के भाभी को लीन लिया था। शायद भावना शाम में डॉक्टर को बुला लाती तो उसकी भाभी बच जाती। मगर मोहल्ले के लफंगे लड़को के डर से डरकर बुलाने नहीं गई और जिसका नतीजा यह निकला कि वह डरकर जिदंगी से हार गई थी।
भावना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। अब उसे भी तो इसी डर के साए में जीना पड़ेगा। मगर कब तक आखिर एक अकेली लड़की कब तक डर के साए में जिंदा रह सकती थी।
भावना भी डर से डर कर अपने आप को समाप्त करने की ठान लेती है।
पास में ही उसका दुप्पटा पड़ा था। वह उसे ही उठाकर कमरे के पंखा में बांधकर अपने लिए फांसी का फंदा बनाने लगती है।
यह कहानी कोई एक शालिनी, उसकी मां नीलम या उसकी बुआ भावना की नहीं थी, बल्कि आज देश के तकरीबन हर शहर के गली मोहल्ले में लफंगे लड़को के द्वारा ऐसी गंदी हरकतें खुलेआम हो रही थी। जिससे सभ्य घरों की लड़कियां हमेशा अपने आप को डरी सहमी महसूस करती थी।
भावना मरने से पहले कागज के एक टुकड़े पर बस इतना ही लिखती है -
" आज देश की बेटियां या तो मां के कोख में सुरक्षित है, या फिर कब्र में। "
कुमार सरोज
दिल को छू देने वाली कहानी
जवाब देंहटाएंजी बहुत बहुत धन्यवाद
हटाएंकब समाज में बेटियां खुले आम आराम से रहेंगी??
जवाब देंहटाएंशायद जब नेता कुर्सी के लिए नहीं समाज की भलाई के लिए काम करेंगे।
हटाएंयही कारण है कि हर ज़वान देश पर शहीद होने से डरता है।👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंशायद हां
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