अनाहिता / Anahita ll कहानी ll कुमार सरोज ll
अनाहिता
कुमार सरोज
यह कहानी अनाहिता नाम की एक नेक दिल एवं बहादुर लड़की की है। जिसका जन्म अंग्रेजों से भारत के आजाद होने के पहले ही 1940 में दिल्ली में हुई थी। वह अपने माता पिता की इकलौती संतान थी।
अनाहिता के पिता डॉक्टर एस के डिसूजा एक क्रिस्चन थे। वही उसकी मां सुजाता एक हिंदू परिवार से थी। डॉक्टर डिसूजा का दिल्ली में ही अपना एक बड़ा क्लिनिक था।
उस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था ही और डॉक्टर डिसूजा की अंग्रेजों से खूब पटती थी।
डॉक्टर डिसूजा को म्यूजिक का बेहद शौक था। वे बिना म्यूजिक सुने ना ही रात में सोते थे, और ना ही सुबह में वो उठते थे। म्यूजिक उनके जीवन का एक बहुमूल्य हिस्सा था।
क्लिनिक में भी जब वो फुर्सत में होते थे तो म्यूजिक सुनने लगते थे।
अगर घर का म्यूजिक सिस्टम कभी येन वक्त पर काम नहीं करता या खराब हो जाता था, तो बच्ची अनाहिता या उसकी मां को ही गाना गाकर उन्हें सुलाना और जगाना पड़ता था। जिसके कारण मजबूरी में अनाहिता की मां भी अब तक गाना गाने के लिए सीख गई थी। वही अनाहिता भी बचपन से ही अपने पिता के शौक के कारण गाना सीख गई थी।
डॉक्टर डिसूजा के एक दोस्त थे डॉक्टर शमशेर आलम। उनका भी दिल्ली में ही अपना क्लिनिक था। डॉक्टर शमशेर को भी म्यूजिक का बड़ा शौक था। शायद इसी कारण से दोनों की खूब पटती थी।
फुर्सत मिलते ही दोनों दोस्तों की महफिल सज जाती थी।
डॉक्टर शमशेर के परिवार में उनकी पत्नी फरजाना बानो के अलावा एक बेटा भी था सजदा आलम।
सजदा अनाहिता से उम्र में 3 ही साल बड़ा था। सजदा भी बचपन से ही बहुत अच्छा गाता था।
समय बीतता गया। 1947 में जब भारत अंग्रेजो के चंगुल से आजाद हुआ तो डॉक्टर डिसूजा अपने परिवार के साथ लंदन चले गए तो डॉक्टर शमशेर अपने परिवार के साथ पाकिस्तानी चले गए। उस समय अनाहिता मात्र सात साल की थी तो सजदा दस साल का था।
अनाहिता एवं सजदा का परिवार अब दो अलग अलग देशों में अपने अपने तरीके से जीने लगे थे। अनाहिता अब लंदन में ही आगे की पढ़ाई करने लगी थी।
सजदा भी अपने नए घर पाकिस्तान में अब आगे की पढ़ाई करने लगा था। वह पढ़ाई के साथ साथ म्यूजिक एवं गाने का भी अभ्यास करने लगा था।
समय अपनी गति से बीतता जा रहा था। देखते ही देखते 20 साल गुजर गए। अब अनाहिता 27 साल की एक खूबसूरत हुस्न की मलिका हो गई थी, तो तो सजदा भी 30 साल का एक खुबसूरत बांका जवान हो गया था।
इन 20 सालों में अनाहिता लंदन में एक डॉक्टर बन गई थी, तो सजदा भी पाकिस्तान का एक फेमस सिंगर बन गया था।
इन दरम्यान डॉक्टर डिसूजा और डॉक्टर शमशेर की टेलीफोन से बात होते रहती थी।
डॉक्टर डिसूजा तो सजदा के गानों के बहुत बड़े दीवाने बन गए थे। वे उसके सभी म्यूजिक एल्बम सबसे पहले सुनते थे। अब घर में सुबह शाम सिर्फ सजदा का ही गाया हुआ गाना बजता था।
सजदा भी जब कभी लंदन अपना म्यूजिक शो करने आता था तो वह अनाहिता के घर जरुर आता था। इसीलिए दोनों के बचपन की दोस्ती कब प्यार में बदल गया किसी को पता भी नहीं चला।
फुर्सत में दोनों अक्सर टेलीफोन पर बातें करते रहते थे। दोनों प्रेमी युगल अब साथ जीने मरने का ख्वाब भी देखने लगे थे।
बात 1967 की है। किसी तरह अनाहिता एवं सजदा के प्यार की खबर दोनों के परिवार को हो जाती है। अनाहिता के पिता को तो दोनों के आपस में प्यार करने से कोई आपत्ति नहीं थी। मगर सजदा के पिता अनाहिता का दुसरा मजहब होने के कारण दोनों की शादी करवाने से साफ इंकार कर देते हैं। भले अनाहिता के पिता से उनकी वर्षों पुरानी दोस्ती थी।
मगर अंततः बेटे के जिद्द के आगे बाप को भी झुकना ही पड़ता है।
अनाहिता और सजदा की शादी हो जाती है। शादी हो जाने से दोनों बहुत खुश थे ।
सजदा शादी के बाद लंदन में ही अपना अलग एक घर ले लेता है। वह अपनी पत्नी अनाहिता के साथ अब अपनी उसी घर में रहने लगता है।
सजदा के पिता ने अपने बेटे के जिद्द के आगे शादी के लिए हां तो कर दिए थे, मगर मन से वे अभी भी नाखुश ही थे। शायद इसी वजह से सजदा लंदन में ही अपनी पत्नी के साथ रहने लगा था। इससे अनाहिता को भी फायदा था। लंदन में रहने के कारण वह अपनी डॉक्टर की नौकरी भी कर ले रही थी।
इसी बीच 1970 में अनाहिता की मां का देहांत हो जाता है। अपनी पत्नी सुजाता के मर जाने के बाद डॉक्टर डिसूजा मानो टूट ही जाते हैं। वे सारा काम धंधा छोड़कर दिन रात घर पर ही उदास रहने लगते हैं। पत्नी सुजाता ही तो डॉक्टर डिसूजा के बढ़ते हर एक कदम की साथी थी। और अब जब वो इस दुनिया में नहीं थी, तो उनके कदम ही मानों थम से गए थे।
डॉक्टर डिसूजा के एकांकी जीवन में अब सजदा के गाए गाने ही एक मात्र सहारा बचा रह गया था। वे हमेशा कमरे में बैठे उसी के गाने सुनते रहते थे।
अनाहिता से अपने पिता का अचानक यूं एकाकी हो जाना देखा नहीं जाता है, आखिर वह ही तो अब अपने पिता की एक मात्र सहारा थी। इसीलिए मां के मरने के बाद अब वह अधिकांश समय अपने पिता के पास ही रहने लगी थी।
वैसे भी अनाहिता का पति सजदा अब अपने म्यूजिक शो में ज्यादा ही व्यस्त रहने लगा था। अब वह दुनिया के बहुत शहरों में शो करने लगा था। कभी शो से फ्री रहता भी तो वह भी अपने मम्मी पापा के पास पाकिस्तान चला जाता था।
अनाहिता और सजदा के शादी के 4 साल हो चुके थे। इन 4 सालों में अनाहिता सिर्फ 2 बार ही अपने ससुर के पास पाकिस्तान गई थी। वो भी सिर्फ 3 - 4 दिन ही दोनों बार वहां रही थी। उसे वहां अपने घर जैसी आजादी नहीं थी। उसे 3 - 4 दिन 3 - 4 साल के बराबर लगता था। वहां उसे सारे तौर तरीके सजदा के घर का ही निभाना पड़ता था। जबकि सजदा लंदन में अपने तरीके से रहने के लिए फ्री था। सजदा भी कभी अनाहिता के पक्ष में नहीं बोलता था। वह भी अपने मम्मी पापा के ही हां में हां मिलाते रहता था।
जब अनाहिता अपने ससुराल पाकिस्तान से वापस लंदन आ जाती थी तो सजदा से उसके घर के तौर तरीके को लेकर नोक झोंक भी हो जाती थी। कभी कभार तो नोक झोंक झगड़ा का रूप भी ले लेता था।
इसी कारण से शायद अब सजदा अपने शो के बहाने बाहर ही ज्यादा रहने लगा था।
अचानक एक दिन डॉक्टर डिसूजा की तबियत ज्यादा खराब हो जाती है। उन्हें लगता है कि वो अब नहीं बचेंगे, इसीलिए वो अपनी अंतिम सांसे गिनते हुए सजदा की लाइव गाना सुनने की फरमाइश अपनी बेटी से कर देते हैं।
अनाहिता अपने पिता की अंतिम ख्वाहिश को पुरा करने के लिए जब सजदा को सारी बात बताती है तो वह फिलहाल लंदन आने से साफ मना कर देता है, क्योंकि पाकिस्तान में उसका वहां के प्रधान मंत्री के यहां उस समय एक शो था।
सुनकर अनाहिता सन्न रह जाती है। वह सजदा को टेलीफोन पर ही बहुत भला बुरा कहती है।
डॉक्टर डिसूजा सजदा के लाइव गाना सुनने के मन में अधूरी ख्वाहिश लिए ही मर जाते हैं। चाहकर भी अनाहिता अपने पिता को नहीं बचा पाती है।
अनाहिता को सजदा से ऐसे व्यवहार की कभी सपने में भी उम्मीद नहीं थी। वह उससे सारे रिश्ते नाते तोड़ने का निश्चय कर लेती है।
सजदा को अनाहिता के इस फैसले से जरा सी दुख नहीं होता है। वह भी तुरंत तलाक ले लेता है।
दोनों सदा के लिए अलग हो जाते हैं। सजदा भी लंदन छोड़कर अब पाकिस्तान में ही बस जाता है।
अनाहिता को अब कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। उसकी तो पुरी दुनिया ही उजड़ गई थी। वह अधिकांश समय शहर से बाहर एक झील के पास एकांत में बैठी रहती थी। जहां कभी वह सजदा के साथ बैठा करती थी।
एक दिन उसी झील के पास अनाहिता की मुलाकात झरना, गजाला, एवं नताशा नाम की 3 लड़कियों से होती है। तीनों सजदा के कारण अनाहिता को भी जानती थी। तीनों लड़कियां लंदन के ही एक कैसिनो ( बार ) में काम करती थी।
झरना नेपाल की थी। उसका परिवार गरीब था। लंदन का ही एक बिजनेसमैन उसे नेपाल से खरीदकर लाया था। 2 साल उसके साथ ऐश मौज करने के बाद उसे घर से निकाल दिया था। किसी तरह अब वह कैसिनो में नाच कर अपना पेट पाल रही थी।
गजाला बंगला देश की थी। उसके दूर के एक रिश्तेदार उससे शादी करके उसे यहां लाया था। अपने साथ 4 साल रखा भी और फिर एक दिन कैसिनो में लाकर बेच दिया। मजबूरन उसे अब उसी कैसिनो में नाचना पड़ता था।
नताशा श्रीलंका की थी। वह अच्छी लिखी भी थी। श्रीलंका का ही एक एजेंट उसे लंदन में अच्छी नौकरी दिलाने के नाम पर एक कैसिनो में छोड़कर भाग गया था। तब से बेचारी वह भी उसी कैसिनो में फंसी नाच रही थी।
अनाहिता इन तीनों की कहानी सुनकर मन ही मन इन्हीं लोगों के साथ मिलकर एक म्यूजिकल बैंड खोलने की योजना बना लेती है। अनाहिता की बात सुनते ही तीनों लड़कियां भी तुरंत तैयार हो जाती हैं।
अनाहिता बचपन में गाना तो गाती ही थी, बस थोड़े से रियाज की जरुरत थी।
अनाहिता के पास पैसा तो था ही, देखते ही देखते उसका म्यूजिकल बैंड पहले पुरे लंदन में, फिर पूरे वर्ल्ड में फेमस हो जाता है।
बैंड में लड़कियां होने के कारण अनाहिता को शो ज्यादा मिलने लगे थे। सजदा के अधिकांश शो भी अब उसे ही मिलने लगे थे।
देखते ही देखते अनाहिता के गानों के लोग दीवाने हो जाते हैं।
उधर सजदा जहां पहले हमेशा शो में व्यस्त रहता था, वही अनाहिता के कारण अब वह हमेशा फ्री रहने लगा था।
इसी बीच एक दिन सजदा के मम्मी पापा का भी देहांत हो जाता है। वह तो पहले से ही शो कम मिलने के कारण दुखी था, अपने मम्मी पापा के अचानक गुजर जाने से वह और दुखी हो जाता है।
धीरे धीरे सजदा की आर्थिक स्थिति भी खराब होने लगती है। क्योंकि शो से ही उसका घर चल रहा था।
इधर अनाहिता और उसका बैंड दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करते जा रहा था। उसके चाहने वालों की संख्या बढ़ते ही जा रही थी।
उधर सजदा के दिन अच्छे होने के नाम नहीं ले रहे थे। अब तो उसका नाम एक सेक्स सकैंडल में भी आ गया था। उसी के ग्रुप की एक लड़की तब्बसूम ने उस पर शादी करने के नाम पर उसके साथ सेक्सुअल रिलेशन बनाने का दावा की थी।
सेक्स स्कैंडल में नाम आते ही सजदा की पुरे पाकिस्तान में थू थू होने लगती है। उससे जब पाकिस्तान में अपनी बेइज्जती सहा नहीं जाता है तो वह वहां से चुपके से लंदन भाग आता है। अब जाकर उसे अपनी करनी पर पश्चाताप हो रहा था।
वह लंदन में आकार अनाहिता से अपनी गलती के लिए माफी मांगने के फिराक में रहने लगता है। शायद यही सोचकर वह अपने पुराने बंद पड़े लंदन वाले घर में आकर रहने लगता है। जहां कभी वह अनाहिता के साथ शादी के बाद के हसीन पल बिताए थे।
बहुत कोशिश करने के बाद भी सजदा को अनाहिता से मिलने का मौका नहीं मिलता है। बहुत करने पर एक दिन संयोग से मौका भी मिलता है तो अनाहिता उससे मिलना तो दूर उसे अपने पास से तुरंत दुत्कार कर भगा देती है।
सजदा मन मारकर उसके घर से चला आता है। वह चाहकर भी अनाहिता के गुस्से को देखकर कुछ कह नहीं पाता है।
उस दिन के बाद से सजदा अब अधिकांश वक्त अपने कमरे में ही शराब के साथ बिताने लगता है। शायद यही अब उसकी नियती बन गई थी।
सजदा का शराब ज्यादा पीने से दिन प्रति दिन स्वास्थ खराब होते जा रहता था।
उधर अनाहिता अपनी कामयाबी की बुलंदी को छू रही थी।
एक दिन की बात है, संजोग से अनाहिता का एक शो सजदा के घर जिसमें अभी वह रह रहा था के ठीक सामने ही रहता है।
सजदा आज तक अनाहिता का कभी लाइव शो नहीं देखा था।
शो के दिन सजदा मन में अनाहिता को लाइव गाते देखने की ललक संजोए लड़खड़ाते कदमों से जैसे ही अपने घर से निकलता है कि वह लड़खड़ाकर जमीन पर धड़ाम से गिर जाता है। चोट से उसका पुरा बदन लहूलुहान हो जाता है।
ठीक उसी समय माईक पर अनाहिता के गाने की आवाज भी गूंजने लगती है।
घायल सजदा उठकर जाने की लाख कोशिश करता है, मगर चोट की वजह से उठ नहीं पाता है। फिर भी वह हिम्मत करके लगातार उठने की नाकामयाब कोशिश करते रहता है।
उधर अनाहिता का गाना जैसे ही खत्म होता है, कि इधर वैसे ही सजदा की सांसें भी सदा के लिए बंद हो जाती है।
वह भी अपने मन में अनाहिता के लाइव गाना सुनते की अधूरी ख्वाहिश लिए ठीक उसी तरह दम तोड़ देता है, जैसे अनाहिता के पिता ने सजदा के लाइव गाना सुनने की मन में अधूरी ख्वाहिश लिए अपना दम तोड़ा था।
कुमार सरोज
लाजवाब कहानी सच में दिल को छू गया।
जवाब देंहटाएंजी बहुत बहुत धन्यवाद
हटाएंबेजोड़ कहानी
जवाब देंहटाएंजी बहुत बहुत धन्यवाद
हटाएं