चिठ्ठी तेरे नाम की / Chiththi Tere Nam Ki । कविता । कुमार सरोज ।

      चिठ्ठी तेरे नाम की
                     कुमार सरोज


आने वाली है हम दोनों के शादी की पच्चीसवीं सालगिरह, 
मैं अभी से ही सोच रहा हूं  तुमको कैसे विश करूं।



मुझे आज भी याद है वो दस पन्नों का अधूरा पहला प्रेम पत्र, 
मगर अब मोबाइल ने तो वो लच्छेदार शब्द ही लीन लिया।

रात भर जाग कर खत लिखने का वो उमंग ही कुछ और था,  
जवाब के लिए डाकिया की राह देखना भी अपना मजा था।

किताब दुकान से शेरों शायरी की किताब खरीदकर लाना, 
प्रेम भरे दोहों को खोजकर लिखना भी अपना ही कला था।

अब तो ना वो चिठ्ठी है और ना ही वो लिखने की ललक,
हम दोनों घर परिवार की जिम्मेदारी में सब भूल ही गए ।

आज सुबह जब उठा तो बरबस मेरे मन में ख्याल आया,
क्यों न इस पच्चीसवीं सालगिरह पर फिर से एक चिठ्ठी लिखूं।

पहला प्रेम पत्र वाला ही अंदाज़ बयां करती वही शब्दे, 
चिठ्ठी तेरे नाम की मेरे सुषुप्त हो रहे प्यार और जज्बात की।

                        कुमार सरोज 

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