वचन / Vachan । कविता । सुमित सिंह राठौर । Bebak Bihari ।
वचन
सुमित सिंह राठौड़
हौसले के उड़ानों को कभी बिखरने मत दिजियेगा,
भरोसे के आदतों को कभी टूटने मत दिजियेगा।
रिश्तों के गाँठ को उलझनें मत दिजियेगा,
हर रिश्ते में उठा पटक होते हैं डरकर मत तोड़ीयेगा।
रिश्तों को तोड़ने में आज बहुतों मंथरा लगी है,
संयमता का परिचय देकर बीती बातों को याद कीजियेगा।
अग्नि समक्ष जो वचन लिए है उसे हर हाल में पुरा कीजियेगा,
यह मिसाल घर परिवार को ही नहीं दुनिया को दिजियेगा।
जो हाथ थामा है उसे कभी छूटने मत दिजियेगा,
जिन्दगी के जो पल निकल जायेंगे वो वापस नहीं आयेंगे।
अपने पल को सुखद बनाकर जिन्दगी को खुशहाल बनाईयेगा,
हौसले के उड़ानों को कभी बिखरने मत दिजियेगा।
सुमित सिंह राठौड़
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