खुली खिड़की / Khuli Khidaki । कहानी । कुमार सरोज ।
खुली खिड़की
कुमार सरोज
आदित्य एक होनहार एवम तेज विधार्थी था। वह दार्जलिंग के एक अच्छे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता था। वह इस बार दसवीं की परीक्षा में स्टेट टॉप किया था। वह हमेशा पढ़ाई में ही व्यस्त रहता था। वह दुनिया के बाकि चीजों से बहुत दूर था। उसके लिए पढ़ाई ही सब कुछ था। पढ़ाई में व्यस्त रहने एवम बोर्डिंग स्कूल में रहने के कारण उसके बचपन के सभी दोस्त दूर होते चले गए थे। वह घर भी सिर्फ गर्मी की छुट्टी में ही जाता था। वहां भी वह ज्यादा समय पढ़ने में ही बिताता था। वह अपनी पढ़ाई को ही ज्यादा महत्त्व देता था।
उसका घर सिलीगुड़ी में था। उसके घर में उसके पिता, बड़े भाई एवम भाभी थी। वह बचपन से ही बोर्डिंग स्कूल में ही पढ़ता आ रहा था।
उसके पिता 5 साल पहले ही नौकरी से रिटायर्ड हो गए थे। नौकरी से रिटायर्ड होने के 2 साल बाद ही उन्हें लकवा मार दिया था। जिसके कारण अब वो ज्यादा समय सिर्फ व्हील चेयर पर बैठे ही रहते थे।
आदित्य का बड़ा भाई सौरव सरकारी नौकरी करता था। एक साल पहले ही उसकी शादी नेहा से हुई थी।
इन चारों के अलावा घर में कोई और नहीं था।
आज आदित्य का बारहवीं कक्षा का रिजल्ट आया है। हर बार की भांति इस बार भी वह स्टेट टॉपर हुआ था।
उसका स्कूल बारहवीं कक्षा तक ही था। इसीलिए बारहवीं कक्षा पास करने के बाद वह सदा के लिए अपने बोर्डिंग स्कूल को बाय बाय बोलकर घर जाने को अकेले ही चल पड़ता है।
पता नहीं क्यों आज वह अन्दर से बहुत खुश था। शायद उसे अब बोर्डिंग स्कूल की बोरिंग टाइम टेबल एवम कड़े अनुशासन से मुक्ति मिलने वाला था इसीलिए।
बारह साल बाद बोर्डिंग स्कूल से निकलकर अब बाहर की दुनिया को खुले मन से जीने का मन में लालसा संजोए आदित्य घर आ जाता है।
पिता जी की बीमारी के कारण घर की आर्थिक स्थिति अब खराब हो गई थी, जिसके वजह से ही आदित्य अब अपने घर सिलीगुड़ी में ही रहकर एक स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेज में आगे की पढ़ाई करने वाला था।
आदित्य की भाभी नेहा बहुत ही खुले एवम आधुनिक विचार की एक कामुक महिला थी। वह हमेशा अपने पति सौरव से चिपके रहना चाहती थी। उसे जब कभी भी मौका मिलता वह अपने पति को बिस्तर पर ले जाकर प्यार के अथाह सागर में गोता लगाने लगती थी। वह जल्दबाजी में अपने कमरे की खिड़की भी कभी बंद नहीं करती थी। सौरव उसे समझाने की बहुत कोशिश करता मगर नेहा के उपर उसके किसी बात का कोई असर नहीं होता था।
आदित्य के पिता शिवनाथ तो हमेशा व्हील चेयर पर ही बैठे रहते थे, इसीलिए नेहा को अपने मन की मुराद पुरी करने में किसी प्रकार की कोई दिक्कत भी नहीं होती थी। बहुत ही मजे से उसकी ज़िन्दगी कट रही थी।
आदित्य सिर्फ अपने भईया की शादी में ही भाभी को देखा था। उसके बाद वह तुरंत स्कूल चला गया था। भईया के शादी के बाद से वह पहली बार अब घर आया था।
आदित्य के घर आने के बाद भी नेहा के शौक में किसी प्रकार का कोई बदलाब नहीं हुआ था। उसे अभी भी आदित्य के घर में होने का जरा भी प्रवाह नहीं था। उसे तो सिर्फ अपने मन की मुराद किसी तरह हर हाल में पुरी करनी थी।
कभी कभार आदित्य भी न चाहकर भी खुली खिड़की से अपने भैया और भाभी को हम बिस्तर होते देख लेटा था। वह शूरू से ही तो बोर्डिंग स्कूल में रहा था, इसीलिए उसे प्यार और पति पत्नी के बीच के रिश्ते की गहराई के बारे में ज्यादा पता नहीं था। वह शुरू में उस ओर ज्यादा ध्यान नहीं देता था।
आदित्य घर आते ही सिलीगुड़ी के ही एक कॉलेज में एडमिशन ले लेटा है। वह कॉलेज पढ़ने जाने भी लगता है। कॉलेज में उसके बचपन के कुछ दोस्त भी पढ़ते थे। सभी पढ़ाई कम और मोबाइल पर पोर्न मूवी या अश्लील बातें करने में ही ज्यादा लगे रहते थे। आज किस लड़की के साथ कौन से होटल में जाना है, सभी का यही प्लानिंग करते करते कॉलेज का सारा समय निकल जाता था।
आदित्य को यहां के कॉलेज का माहौल जरा भी पसंद नहीं था। कहां उसके बोर्डिंग स्कूल का अनुशासन और कहां इस कॉलेज का माहौल। बहुत का अंतर था दोनों शिक्षण संस्थाओं के माहौल और पढ़ाने के तरीके में। कुछेक को छोड़ यहां सभी सिर्फ टाईम पास करने एवम लड़कियों से इश्क लड़ाने ही आते थे।
आदित्य को इस कॉलेज में पढ़ाई करने में जरा भी मन नहीं लगता था। मगर वह बेचारा क्या करता, यही पढ़ना अब उसकी मजबूरी थी।
आदित्य अपने दोस्तों से दूर भी होना चाहता था, मगर वे लोग उससे बुक एवम नोट्स के कारण चिपके ही रहते थे।
आदित्य के घर में भी भाभी की अपने पति के साथ सेक्सुअल गतिविधियां अभी भी बदस्तूर पहले जैसे ही जारी थी।
आदित्य के लिए तो कॉलेज और घर सेक्स की प्रारंभिक पाठशाला जैसा हो गया था।
कहा जाता है किसी चीज़ को बार बार देखते रहने एवम उसके बारे में बार बार सुनते रहने से आदमी एक न एक दिन उसका आदि हो ही जाता है।
ठीक ऐसा ही आदित्य के साथ भी होता है। अब घर में भाभी के अर्ध नग्न बदन को खुली खिड़की से छिप कर देखना उसे अच्छा लगने लगा है। वह हमेशा अब भाभी को लुक छिप कर देखते रहना चाहता था। उसे अब कॉलेज में दोस्तों की बाते भी अच्छा लगने लगा था। मगर वह किसी के ऊपर अपने मन में उठ रहे लहरों को जाहिर नहीं होने देता था। अब तो वह अनट्रेंड प्लेयर बनकर सेक्स रूपी मैदान में मन में संकुचित भाव लिए अंदर से डरा सहमा उतरने को बैचन हो गया था।
तभी कॉलेज में गर्मी की छुट्टी हो जाती है।
अचानक एक दिन आदित्य के पिता के दोस्त सतपाल जी अपनी बेटी स्वीटी के साथ गर्मी की छुट्टी मनाने सिलीगुड़ी उसके घर आते हैं। वो रिटायर्ड होकर अब दिल्ली में घर बनाकर रह रहे थे। वो तो अभी से ही अपनी बेटी की शादी आदित्य से करवाने की भी सोच रखे थे। स्वीटी भी आदित्य को चाहती थी।
स्वीटी आज की हाई फाई मॉडर्न लड़की थी। उसके लिए सेक्स और नशा करना आम बात थी।
सौरव तो ऑफिस चला जाता था, जिसके कारण स्वीटी आदित्य के साथ ही कहीं बाहर घूमने जाती थी। स्वीटी आदित्य से हमेशा उसकी गर्ल फ्रेंड कितनी है, वह अभी तक कितने बार सेक्स किया है, और बहुत सी ऐसी बातें ही किया करती थी। आदित्य भी तो अब धीरे धीरे सेक्स और वासना विज्ञान के क्षेत्र में कदम रख ही दिया था, उसे भी स्वीटी की बातें अच्छी लगती थी। वह भी हमेशा स्वीटी के बदन को स्पर्श करने के चक्कर में लगा रहता था। मगर आदित्य अभी नया नया ही इस क्षेत्र में दाखिल हुआ था, इसीलिए वह झिझक वश कुछ कर या कह नहीं पाता था। सिर्फ स्वीटी की बातें सुनकर मन ही मन वह बहुत खुश होता था। अब तो उसके शरीर के अन्दर भी वासना रूपी कीड़े पनपकर हिलौर मारने लगे थे। खुली खिड़की से चला सफर अब किसी को बिस्तर की सोभा बनाने को मचल रहा था।
दस दिन बाद ही स्वीटी आदित्य के दिलों दिमाग में सेक्स की प्रबल भूख बढ़ाकर वापस दिल्ली चली जाती है।
स्वीटी के जाते ही उसके मन में बैचैनी बढ़ने लगती है। उसके दिलों दिमाग में अब सेक्स करने का भूत सवार हो चुका था। सोते जागते, उठते
बैठते हमेशा उसे अब वासना की भूख लगी रहती थी।
अब रात को वह अचानक उठकर भाभी के कमरे की खुली खिड़की से अन्दर झांकने लगता था। अपने भैया भाभी को हम बिस्तर होते देख वह अचानक जोर जोर से हांफने लगता था। जब हांफते हांफते उसका पुरा शरीर पसीना से डूब जाता था, तब अंत में वह उसी अवस्था में अपने कमरे में आकर शांत होकर सो जाता था।
आदित्य का अब यह रोज का रूटीन बन गया था।
एक दिन आदित्य शाम में जैसे ही अपने कमरे से निकलता है कि सामने अपनी भाभी को बाथरूम में नहाते जाते देख वह भी झट से छिप कर दरवाजे की कीहोल से अपनी भाभी को नहाते देखने लगता है। अपनी भाभी के नग्न जिस्म को देख उसके बदन में वासना की आग हिलोर मारने लगती है। वह जोर जोर से हांफने लगता है। उसके शरीर से पसीने की धार निकलने लगती है। वह उसी अवस्था में अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेटकर बैचैनी से छटपटाने लगता है। हांफते छटपटाते वह वैसे ही शांत हो जाता है।
तभी सौरव भी ऑफिस से घर आ जाता है। पिता जी के कहने पर जब चाय पीने के लिए आदित्य को सौरव बुलाता है तो वह झट जैसे अभी पसीने में डूबा लेटा था वैसे ही घडबड़ाहट में वहां आ जाता है।
ड्राइंग रूम में जब आदित्य आता है तो उसके बदहाल स्थिति को देखकर उसके पिता उसे सलाह देते हैं कि वह पढ़ाई कम करे, क्योंकि उन्हें लगता है कि ज्यादा पढ़ाई में व्यस्त रहने के कारण ही उसकी ऐसी हालत हो गई थी। सौरव भी उसे अपना ख्याल रखने को कहता है। आदित्य सिर्फ हां में हां मिलाते रह जाता है।
आदित्य को रात में अब सिर्फ उसकी भाभी और स्वीटी का चेहरा ही आखों के सामने नाचते रहता था। उसके आंखों से नींद गायब हो गई थी। जब उसकी बैचनी ज्यादा बढ़ जाती थी तब वह अपना लेपटॉप निकालकर उस पर पॉर्न फिल्म देखने लगता था। फिल्म देखते देखते ही वह हांफने लगता, और फिर उसका पुरा शरीर पसीने से डूब जाता था। आज पहली बार उसके मुंह से झाग भी निकला था। अंत में वह वैसे ही शांत होकर सो गया था।
सुबह जब बुलाने पर भी आदित्य नाश्ता के टेबल पर खाने नहीं आता है तो सौरव के कहने पर नेहा उसे बुलाकर लाने उसके कमरे की ओर चल देती है।
उस समय भी आदित्य रात वाली स्थिति में ही सो रहा था। नेहा पहले तो 2 - 3 बार आवाज देकर जगाती है, मगर जब वह नहीं उठता है तो उसे अपने हाथों से पकड़कर जगाने लगती है।
आदित्य अपनी भाभी का स्पर्श पाते ही तुरंत उठकर बैठ जाता है। सामने अपनी भाभी को देखते ही उसके शरीर में तेजी से बदलाव होने लगता है। उसके अंदर के वासना रूपी कीड़े उबाल मारने लगते हैं। उसका एक मन करता है कि वह अपनी भाभी को पकड़कर अभी बिस्तर में खींच ले, पर लोक लाज के कारण अपने आप को रोकने की भरपूर कोशिश करते रहता है। देखते ही देखते वह जोर जोर से हांफने लगता है। उसके मुंह से झाग भी निकलने लगता है। और अंत में वह उसी अवस्था में बेहोश होकर शांत हो जाता है।
नेहा आदित्य की ऐसी हालत देख जोर जोर से चीखने लगती है। उसकी आवाज सुन ड्राइंग रूम से पहले सौरव उसके बाद उसके पिता भी अपनी व्हील चेयर पर आ जाते हैं।
सौरव तुरंत आदित्य को अपने फेमिली डॉक्टर सिंह के पास ले कर चल पड़ता है।
आदित्य को रास्ते में ही होश आ जाता है। डॉक्टर के पास जाते जाते तो वह एकदम सामान्य हो जाता है।
डॉक्टर सिंह भी जब आदित्य का चेकअप करते हैं तो सभी चीज समान्य ही रहता है। वे शायद पढाई के टेंशन की वजह से ऐसा हुआ होगा बोलकर उसे घर भेज देते हैं।
आदित्य के बीमार होने की बात सुनकर स्वीटी भी अपने पिता के साथ दिल्ली से सिलीगुडी आ जाती है।
जिस दिन स्वीटी आदित्य से मिलने उसके घर आती है, उसी दिन शाम में वह आदित्य के कमरे में बैठकर उससे बाते करते रहती है। वह तो खुली विचारों की थी ही बातें करते करते वह आदित्य के हाथ को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगती है। फिर क्या था, आदित्य के जिस्म में स्वीटी का स्पर्श पाते ही बेचैनी शूरू हो जाती है। वह जोर जोर से हांफने लगता है। उसकी ऐसी हालत देख स्वीटी जोर जोर से चीखने चिल्लाने लगती है।
स्वीटी के चीखने की आवाज सुनकर घर के सभी सदस्य वहां आ जाते हैं।
सौरव अपने फैमिली डॉक्टर सिंह को फोन करके तुरंत बुला लेता है।
डॉक्टर के आने से पहले ही आदित्य फिर से सामान्य हो जाता है। डाक्टर कुछ टेस्ट करवाने को बोलकर चले जाते हैं।
शाम में स्वीटी भी अपने पिता के साथ ही दिल्ली चली जाती है।
शाम में सौरव अपने कमरे में बैठा अपने भाई के बारे में ही सोच रहा था। वह भाई को लेकर काफ़ी परेशान था। पहले पिता की बीमारी और अब आदित्य की यह हालत देख वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे।
तभी कमरे में नेहा आ जाती है। वह आदित्य के बीमारी में होने वाले खर्च को लेकर टेंशन में थी। वह भी अपने पति के पास आकर बैठ जाती है। बात बात में ही पैसे की खर्च को लेकर दोनों पति पत्नी में बहस होने लगती है। अंत में सौरव ही कमरे से निकल कर आदित्य के कमरे की ओर चल देता है।
उधर आदित्य अपने कमरे में बैठा पढ़ते रहता है, कि अचानक वह पास रखे लैपटॉप को कुछ सोचते हुए स्टार्ट करने लगता है। मगर कुछ सोचकर बंद कर देता है। वह कई बार ऐसा ही करता है। मगर अंततः वह अपने आप को रोक नहींपाता है और लैपटॉप स्टार्ट करके पोर्न फिल्म देखने लगता है।
वह इधर फिल्म देखते रहता है और उधर तभी सौरव कमरे में आ जाता है। आदित्य फ़िल्म देखने में इतना मशगूल था कि उसे अपने भाई के आने का जरा भी आभास नहीं होता है।
इधर सौरव आदित्य को एवम उसके अंदर आए इस बदलाब को देखकर दंग रह जाता है। आखिर ये सब क्या हो रहा था ? पहले तो आदित्य ऐसा नहीं था। आखिर अब वह ऐसा कैसे हो गया था ?
मन में हजारों सवाल लिए सौरव चुपके से अपने पिता के कमरे की ओर चल देता है।
अगले ही दिन सौरव डॉक्टर सिंह से मिलकर आदित्य में आए बदलाब के बारे में उन्हें पुरी बात बता देता है। सुनते ही डॉक्टर सिंह उसे अपने पहचान के एक साइको डॉक्टर महेश से मिलने की सलाह देते हैं।
घर आकर सौरव अपने पिता एवम नेहा को सारी बात बता देता है। शिवनाथ सुनकर चौंक जाते हैं। नेहा को तो सुनते ही डर सताने लगता है। वह बीमारी को छिपाने की सलाह दे डालती है। उसके ससुर शिवनाथ भी अपनी बहु के हां में हां मिलाते हैं। मगर सौरव डॉक्टर से मिलकर आदित्य की ईलाज करवाने के बात पर अड़ जाता है।
उस रात सभी जल्दी खाना खा कर अपने अपने कमरे में चले जाते हैं।
नेहा अभी भी अंदर ही अंदर आदित्य से बहुत डरी हुई थी।
आदित्य खाना खा कर जैसे ही अपने कमरे कि ओर जाते रहता है कि अचानक उसकी नज़र जल्दबाजी में छूटे रह गए स्वीटी के मेकअप किट एवम कुछ अंडरगार्मेंट कपड़े पर पड़ जाती है। वह कुछ सोचकर मुस्कुराते हुए झट सारा सामान लेकर अपने कमरे में आ जाता है।
कमरे में आते ही वह तुरंत अपना दरवाजा बंद कर लेता है। दरवाजा बंद करके वह कमरे में लगे आदमकद शीशे के सामने खड़ा होकर अपने आप को शीशे में गौर से निहारने लगता है।
अचानक वह अपने शरीर से सभी कपड़ा धीरे धीरे खोलने लगता है। देखते ही देखते वह पुरी तरह से नग्न हो जाता है। उसके बाद वह स्वीटी के अंडरगार्मेंट उठाकर स्वयं एक एक कर पहनने लगता है। कपड़ा पहनकर वह मेकअप बॉक्स से खुद ही अपना मेकअप भी करने लगता है। मेकअप करके वह अपना लैपटॉप निकालकर उसपर पोर्न फिल्म देखने लगता है।
आदित्य फिल्म देखते ही देखते हांफते हुए पसीने से लथपथ होकर बेड पर वैसे ही लुढ़कर शांत हो जाता है।
सुबह में सौरव घर में बिना किसी को कुछ बताए साइको डॉक्टर महेश से जाकर मिलता है। डॉक्टर सौरव से पुरी बात सुनते ही समझ जाता है कि उसे हिस्टीरिया हुआ है। सौरव का तो डॉक्टर से बीमारी के बारे में सुनते ही होश उड़ जाता है।
सौरव घर में किसी को कुछ नहीं बताता है। वह आदित्य के बारे में ही सोच में डूबा रहने लगता है। उसे अभी तक कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह बीमारी आदित्य को हुआ तो हुआ कैसे !
सुबह आदित्य नहाने के लिए जैसे ही बाथरूम में जाता है कि तभी सौरव उसके कमरे में जाकर उसके सामानों को देखने लगता है। आदित्य के कमरे में मिले समान को देखकर सौरव के पैर तले की जमीन खिसक जाती है। कमरे में बहुत सारे सैक्सुअल बूक और सीडी पड़े थे। स्वीटी का कपड़ा और मेकअप किट अभी भी वैसे ही कमरे में पड़ा था।
सौरव को ये सब देखकर कभी आदित्य पर गुस्सा तो कभी उसकी बेबसी पर तरस आने लगता है। मन ही मन कुछ सोचता हुआ वह कमरे से बाहर निकल जाता है।
दूसरे दिन सौरव शाम में आदित्य को लेकर एक होटल में जाता है। वहां उसे एक कमरे में अकेले छोड़कर वह बाहर आ जाता है। आदित्य को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उसके भईया उसे यहां लाए क्यों थे।
सौरव को कमरे से गए कुछ ही देर होता है कि कमरे में एक सुन्दर मॉडर्न लड़की प्रवेश करती है। वास्तव में वह एक कॉल गर्ल थी, जिसे सौरव ने ही अपने भाई आदित्य के लिए हायर किया था। आदित्य की बीमारी सेक्स करने से ही खत्म होने वाली थी। वह दिन रात सेक्स के बारे में सोच कर एवम देखकर अपने अंदर हिस्टीरिया जैसी बीमारी पाल रखा था।
मगर सौरव को क्या पता था कि बेचारा आदित्य जिसने आज तक पढ़ाई के अलावा कभी किसी दुसरी ओर ध्यान भी नहीं दिया था, उसे अचानक घर और कॉलेज के जैसे कामुक माहौल से सामना होगा। बोर्डिंग स्कूल के लाईफ और आम लाइफ में वह शायद सही समंजस नहीं बैठा पाया था। तभी तो उसे यह बीमारी लग गई थी।
आदित्य अभी कमरे में आने के उलझन में उलझा हुआ ही था कि अचानक सामने एक खूबसूरत लड़की को देखकर वह दंग रह जाता है।
वह अभी कुछ पुछ पाता तभी वह लड़की उसके पास आकर उसके हाथ को पकड़कर चूम लेती है। लड़की का स्पर्श पाते ही उसका पुरा शरीर रोमांस से खिल उठता है। वह जोश में आकर लड़की को बाहों में लेकर जोर जोर से चूमने लगता है। लड़की उसके व्यवहार को देखकर सहम उठती है। वह अपने आप को उसके चंगुल से आजाद कराने की कोशिश करने लगती है। मगर आदित्य उसे बेड पर गिराकर उसे पागलों की भांति चूमते हुए उसके कपड़े निकालने लगता है। लड़की समझ जाती है कि जरुर यह लड़का पागल है। लड़की के मन में पागलपन का ख्याल आते ही वह अपनी पुरी ताकत लगाकर आदित्य को एक तरफ़ धकेलकर उसी अवस्था में कमरे से बाहर की ओर भाग खड़ी होती है।
आदित्य सिर्फ बदहवास चीखता चिल्लाता रह जाता है। तभी कमरे में बाहर से सौरव भी आ जाता है। वह आदित्य को पकड़कर संभालने लगता है।
रात में जब सभी खाने के टेबल पर जमा होते हैं तो सौरव एवम आदित्य की नजरे आपस में झुकी रहती है। उसके पिता एवम पत्नी बहुत जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर वह शाम में आदित्य को लेकर कहां गया था। मगर वह किसी को कुछ नहीं बताता है। अंत में सभी के सवालों से तंग आकर वह आधे पेट ही खाकर तुरंत वहां से चला जाता है। उसके जाते ही पीछे से नेहा भी उसी ओर चल पड़ती है।
दोनों के जाते ही शिवनाथ आदित्य से भी पूछने लगते हैं कि वह शाम में कहां गया था, और दोनों भाई आज उदास क्यों हैं ? मगर वह भी कुछ नहीं बताता है, और वहां से अपने कमरे की ओर चल देता है। सभी के जाते ही बेचारे शिवनाथ अपनी हालत एवम बेबसी पर रोने लगते हैं।
अगले दिन सुबह में ही स्वीटी फिर से अपने पिता के साथ आदित्य का हाल चाल जानने आ जाती है। उस समय शिवनाथ घर के मुख्य दरवाजे के पास ही लॉन में बैठे अखबार पढ़ते रहते हैं। सतपाल उन्हीं के पास रुक जाते हैं। स्वीटी आदित्य से मिलने उसके कमरे की ओर चल देती है।
शिवनाथ बातों ही बातों में अपने दोस्त सतपाल को आदित्य के हिस्टीरिया वाली बीमारी के बारे में बता देते हैं। सुन सतपाल सन रह जाते हैं। जहां पहले वे आदित्य को अपना दामाद बनाने को सोच रहे थे, वहीं अब उन्हें उससे घृणा होने लगी थी। वे स्वीटी को लेकर अब परेशान होने लगे थे।
उधर स्वीटी अभी आदित्य के कमरे के पास पहुंचती ही है कि एक तरफ से तेजी से नेहा आकर उसे पकड़कर अपने कमरे में लेकर आ जाती है।
स्वीटी के पूछने पर वह आदित्य के बीमारी के बारे में उसे पुरी बात बता देती है। सुनते ही उसके भी होश उड़ जाते हैं। वह तुरंत आदित्य से बिना मिले ही बाहर की ओर चल अपने पिता के पास चल देती है।
इधर सतपाल अभी स्वीटी को ही आवाज लगाकर बुलाने वाले थे कि वह घर से बाहर आती दिख जाती है।
दोनों बाप बेटी तुरंत वहां से चले जाते हैं। सतपाल दोनों को रुकने के लिए लाख कहते रह जाते हैं।
उसी दिन सुबह में ही नाश्ता करने के बाद सौरव आदित्य को साइको डॉक्टर महेश के पास ले जाता है। नेहा लाख मना करते रह जाती है, मगर वह नहीं मानता है। नेहा को अपने खानदान की बदनामी एवम बेकार के खर्च की चिन्ता सता रही थी।
सौरव जब आदित्य को लेकर डॉक्टर के पास जाता है तो उस समय डॉक्टर की बेटी सलोनी जो की खुद भी जूनियर डॉक्टर थी, साथ में बैठी रहती है।
सलोनी आदित्य के साथ ही पहले प्राइमरी स्कूल में पढ़ी थी। इसीलिए वह उसे जानती थी। दोनों बचपन के दोस्त भी थे। मगर आदित्य के बोर्डिंग स्कूल चले जाने के बाद उससे बात नहीं होती थी।
वैसे भी पढाई में स्टेट टॉपर होने के कारण नाम से आदित्य को शहर के लगभग सभी लोग जानते थे।
डॉक्टर आदित्य से कुछ सवाल पूछते हैं, मगर वह कोई संतोषप्रद जवाब नहीं देता है। तब वे सलोनी को उसे बगल वाले कमरे के अंदर ले जाने को बोलते हैं।
अपने डॉक्टर पिता के कहने पर सलोनी आदित्य को लेकर बगल के एक कमरे में चली जाती है। डॉक्टर महेश खुद टेबल पर लगे कैमरा के मॉनिटर पर कमरा के अंदर हो रहे आदित्य के हरकतों को देखने लगते हैं।
उधर सलोनी जिसे आदित्य के बीमारी के बारे में पता था। जैसे ही आदित्य को लिटा कर उसके शरीर का चेकअप करने लगती है, वैसे ही उसका स्पर्श पाकर आदित्य के शरीर में तूफान उबाल मारने लगता है। वह हाँफते हुए सलौनी को बाहों में लेने की कोशिश करने लगता है। फिर से उसका पुरा शरीर पसीने से भीग जाता है।
तभी कमरे में बाहर से दो लड़के आकर आदित्य को पकड़ लेटे हैं। आदित्य हांफता, छटपटाता अंततः शांत होकर बेड पर लेट जाता है। उसके मुंह से झाग अभी भी निकल रहा था।
आदित्य को शांत होते ही सलोनी कमरे से बाहर निकल जाती है। वह जाते जाते भी आदित्य के ही चेहरे को देख रही थी। अब वह भी चिंतित दिखाई दे रही थी। आखिर आदित्य उसके बचपन का दोस्त जो था।
इधर डॉक्टर महेश मॉनिटर पर सब कुछ देखते रहते हैं। पास में ही बैठा हुआ सौरव भी सब कुछ देखते रहता है। डॉक्टर महेश सौरव को बताते हैं कि जरुर इसने कहीं किसी को बार बार सेक्स करते देखा है। इसके शरीर में वासना की प्रबल इच्छा हीलोर मार रही है। इसी वजह से यह किसी भी लड़की या औरत के स्पर्श पाते ही ऐसा करने लगता है। डॉक्टर सौरव को आदित्य की शादी करवाने की सलाह देते हैं। मगर वह तैयार नहीं होता है। आदित्य को तो अभी पढ़ना था। वैसे भी अभी उसकी उमर ही क्या थी। 19 साल का ही तो था वह।
दोनों बात करते ही रहते हैं कि कमरे के अंदर से सलोनी भी वहां आ जाती है। अपने पिता की शादी वाली सलाह वह भी नहीं मानती है। वह आदित्य का ईलाज करना चाहती थी।
सौरव और सलोनी के जिद्द के आगे डॉक्टर महेश आदित्य के ईलाज करने के लिए तैयार हो जाते हैं। आदित्य को सलोनी के ही देख रेख में हॉस्पिटल में एडमिट कर लिया जाता है।
शाम में जब सलोनी आदित्य के वार्ड में जाती है तो उस समय वह बेड पर लेटा छत को निहार रहा था। सलोनी चुपके से उसके पास आकर बैठ जाती है। मगर उसके बैठने का आभास आदित्य को हो जाता है। वह झट उठकर बैठ जाता है।
सलोनी उससे बचपन की बातें करने लगती है। दोनों आपस में बातें करने लगते हैं। अभी तक सलोनी आदित्य से दूर ही बैठी थी। आदित्य एकदम समान्य दिख रहा था। वह उसे कुछ दवा खाने को देती है।
सलोनी कुछ देर बात करने के बाद थोड़ी देर में फिर आने को बोलकर चली जाती है। आदित्य उसे ही जाते हुए गौर से देखते रहता है। अब उसके चेहरे पर मुस्कान थी।
इधर रात में जब सौरव खाने के टेबल पर आता है तो उसके पिता आदित्य के बारे में पुछ बैठते हैं कि वह उसे कहां छोड़ आया है। नेहा भी पूछने लगती है। मगर सौरव किसी को कुछ नहीं बताता है। वह चुप चाप खाना खाते रहता है।
सौरव के कुछ नहीं बताने पर उसके पिता शिवनाथ गुस्से में वहां से चले जाते हैं।
अपने ससुर को जाते ही नेहा अपने पति को भला बुरा कहने लगती है। उसके वजह से आज खानदान की बदनामी होने वाली थी। नेहा के अनुसार सौरव आदित्य के ऊपर फालतू का वह पैसा खर्च कर रहा था।
जब सौरव को नेहा का बेवजह गुस्सा करना हद से ज्यादा लगने लगता है तो उसे रहा नहीं जाता है। वह नेहा को यह बता देता है कि आज आदित्य के ऐसे हालात की वजह वह ख़ुद ही थी।
" नेहा आज तुम जो इतना इल्जाम आदित्य के चरित्र पर लगा रही हो उसकी वजह भी तुम हो। तुम्हारे ही खुलेआम प्यार करने के लत को वह खुली खिड़की से देख देख कर आज ऐसा बन गया है। पति के साथ भी प्यार कम से कम बंद कमरे में ही अच्छा लगता है। एक पत्नी को कम से कम घर में रह रहे दूसरे सदस्य के होने का भी आभास होना चाहिए। मगर तुमने आज तक घर में कभी किसी के होने का प्रवाह ही नहीं किया। तुम्हारे लिए दिन और रात सब एक सामान था। "
सौरव आज पहली बार अपनी पत्नी को उसके गलत लत के कारण डांट रहा था, और वह चुप चाप सिर्फ सब कुछ सुन रही थी।
" आदित्य शुरू से ही बोर्डिंग स्कूल में रहा है उसे बाहर के आम दुनिया के रहन सहन और चाल चलन का अभी ज्यादा तजुर्बा नहीं था। उसे घर में आते ही तुम्हारे कामुक अंदाज का सामना करना पड़ा, कॉलेज में भी उसे वैसा ही माहौल मिला, जहां बच्चे पढ़ाई कम और सेक्स की बातें ही ज्यादा करते हैं। ऊपर से घर में स्वीटी आकर आदित्य के जख्म पर और नमक मिर्च डाल दी। इसमें भला उस बेचारे आदित्य का क्या दोष था। आज वह किस हालात से गुजर रहा है शायद किसी को जरा भी आभास नहीं है। "
सौरव अपने घुन में बोलता जा रहा था। अंत में बोलते बोलते वह गुस्से में ही वहां से चला जाता है।
नेहा को अपने पति की बातें सुनकर आज पहली बार अपने आप पर गुस्सा आ रहा था। वह चुप चाप उदास वही बैठ जाती है।
इधर हॉस्पिटल में आदित्य सुबह उठकर जैसे ही फ्रेस होकर बाथरूम से निकलता है कि सलोनी चाय बिस्किट लेकर आ जाती है।
आदित्य उसे देखकर मुस्कुराते हुए चाय पीने लगता है।
सलोनी कमरे में लगा टीवी चला कर पास ही बैठ जाती है।
कुछ देर तक दोनों बचपन की ही बातें करते करते हैं। कुछ देर बाद दवा देकर सलोनी चली जाती है।
वह अभी आदित्य से दूर ही रहती थी। मगर वह उसके साथ अपनत्व और प्यार बनाए हुए थी।
अगले ही दिन आदित्य का जन्म दिन था। वह अब बीस साल का हो गया था।
सौरव हॉस्पिटल आकर आदित्य को जन्म दिन की बधाई देता है।
सलोनी भी अपने पिता से आज्ञा लेकर उस दिन आदित्य को घुमाने के लिए शहर से बाहर चल देती है। वैसे भी आदित्य के व्यवहार में अब कुछ सुधार हो रहा था।
सलोनी आदित्य को लेकर एक खुबसूरत पहाड़ी पर आ जाती है। शाम का समय होने के कारण वहां का माहौल एक दम सुहाना और मनोरम था। दोनों वही बैठ कर बातें करने लगते हैं।
शांत और हसीन वातावरण और उपर से दो जवानी के दहलीज पर खड़े बचपन के साथी, दोनों बातें करते करते ही एक दुसरे के बाहों में समा जाते हैं।
फिर क्या था, आदित्य को पहली बार एक नए चरम सुख एवम आनंद की अनुभूति होती है उस दिन। अंत में दोनों थक कर वही लेट जाते हैं।
आदित्य आज पहली बार अपने आप को एकदम हल्का और अंदर से बहुत खुश महसूस कर रहा था।
वही सलोनी भी जो बचपन के साथी को अब जीवन भर के लिए अपना बनाने की सोच चुकी थी, आदित्य के हाथ को अपने हाथ में लिए अब वह भी बहुत सकून महसूस कर रही थी।
सुबह जब हॉस्पिटल में आदित्य उठता है तो उसे सब कुछ अब सामान्य लगने लगता है। उसे ऐसा लगता है मानो उसे कभी कुछ हुआ ही नहीं था।
वह फ्रेस होकर सबसे पहले डॉक्टर महेश से मिलता है। उसके बाद वह सलोनी से मिलने चल देता है।
उस समय सलोनी घर से हॉस्पिटल अपने केबिन में आई ही थी, कि आदित्य वहां आ जाता है। दोनों एक दूसरे को देखते ही मुस्कुराते हुए नजरे झुका लेते हैं।
दोनों में से कोई कुछ बोलता तभी सौरव भी अपने घर से वहां आदित्य से मिलने आ जाता है। आदित्य अपने भईया से बहुत ही सामान्य तरीके से बात करता है।
आदित्य के व्यवहार को देखकर आज सभी बहुत खुश थे। वह अब एकदम सामान्य लग रहा था। सलोनी या हॉस्पिटल के और दूसरे फीमेल स्टॉफ के साथ भी वह अच्छा व्यवहार कर रहा था।
सौरव डॉक्टर महेश एवम सलोनी से मिलकर आदित्य को लेकर अपने घर आ जाता है। आज सच में वह बहुत खुश था।
अगले दिन सुबह में आदित्य सभी के साथ बैठा नाश्ता करते ही रहता है कि डॉक्टर महेश अपनी बेटी सलोनी के साथ आ जाते हैं। आदित्य के ठीक हो जाने के कारण उस समय सभी बहुत खुश थे।
सौरव उन दोनों को भी जबरदस्ती साथ में ही नाश्ता करने के लिए टेबल पर बैठा लेता है।
आदित्य और सलोनी नाश्ता करते हुए एक दुसरे को ही ऐसे देख रहे थे, मानों दोनों एक दूजे के लिए ही बने थे।
नेहा भी नाश्ता करती हुई बार बार अपने कमरे के उस खिड़की की ओर ही देख रही थी, जो हमेशा खुली ही रहती थी, मगर आज वह खिड़की खुली नहीं थी बल्कि बंद थी।
कुमार सरोज
लाजवाब कहानी
जवाब देंहटाएंजी बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार
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