करवा चौथ व्रत की विधि एवम सामग्री की ऐसे करें तैयारी / Karva Chauth Vrat ki Vidhi avam samagri ki aise Karen Taiyari
करवा चौथ व्रत की ऐसे करें तैयारी
ये व्रत अपने नियमों को लेकर बेहद कठिन माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा करती हैं।
पूजा के लिए मंदिर की सफाई करना, कलश सजाना और पूजा की थाली का विशेष महत्व है। पूजा की थाली को 'बाया' भी कहते हैं, जिसमें सिन्दूर, रोली, जल और सूखे मेवे रहते हैं. थाली पर मिट्टी के दीए के साथ ही पूजा की और भी जरूरी चीजें रखी जाती हैं।
करवा चौथ व्रत की विधि
करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होता है. इसलिए सुबह सूर्य निकलने से पहले सास द्वारा भेजी गई सरगी का सेवन कर लेना चाहिए। इसके बाद स्नानादि करने के पश्चात संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ कर देना चाहिए। पूरे दिन निर्जल रहना चाहिए।
आठ पूरियों की अठावरी और हलुवा बना लेना चाहिए। पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेश जी बनाकर बिठाना चाहिए। गौरी को चुनरी ओढ़ा कर, बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करना चाहिए।
इसके बाद करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भरकर उसके ऊपर दक्षिणा रख लेना चाहिए। रोली से करवा पर स्वस्तिक बना ले। गौरी - गणेश की परंपरानुसार पूजा करना चाहिए। पति की दीर्घायु की कामना करते रहना चाहिए।
करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा को स्वयं पढ़े या किसी और से सुनना चाहिए। कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सास या घर में जो कोई भी सबसे बुजुर्ग स्त्री रहे उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए और करवा उन्हें दे देना चाहिए।
रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से अपने पति को देखना चाहिए और चन्द्रमा को अर्ध्य देने के बाद पति से आशीर्वाद लेना चाहिए। उसके बाद अपने पति को भोजन करा कर स्वयं भी भोजन कर लेना चाहिए।
करवा चौथ पूजन के लिए जरूरी सामग्री
1. चंदन
2. शहद
3. अगरबत्ती
4. पुष्प
5. कच्चा दूध
6. शक्कर
7. शुद्ध घी
8. दही
9. मिठाई
10. गंगाजल
11. कुंकू
12. अक्षत (चावल)
13. सिंदूर
14. मेहंदी
15. महावर
16. कंघा
17. बिंदी
18. चुनरी
19. चूड़ी
20. बिछुआ
21. मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन
22. दीपक
23. रुई
24. कपूर
25. गेहूं
26. शक्कर का बूरा
27. हल्दी
28. पानी का लोटा
29. गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी
30. लकड़ी का आसन
31. चलनी
32. आठ पूरियों की अठावरी
33. हलुआ
34. दक्षिणा (दान) के लिए पैस
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