दीपावली में मिट्टी के दीए का महत्व / Dipawali me Mitti ke Diye ka mahatva

     पहले जहाँ कुम्हारों से साधारण दिए खरीदे जाते थे, आजकल वही अब कई रंगों और परिवेशों में मिलने लगे हैं । इतना तो सभी को पता है कि दिए दिवाली पर लेने चाहिए, लेकिन क्यूँ लेने चाहिए ये शायद किसी को भी पूर्ण रूप से नहीं पता है।  आइये जानते हैं दिए और उनके दिवाली में महत्त्व से जुड़ी कुछ अहम् बातें |

   दिया बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है 

         कहते हैं जैसे श्री राम ने रावण का वध कर बुराई के ऊपर अपनी जीत स्थापित की थी, उसी प्रकार दिया भी अँधेरे को मिटा रौशनी फैलाता है । अँधेरा यहाँ बुराई और दिए की रौशनी अच्छाई का प्रतीक है। कहते हैं की दीयों को जला हम अपने मन और जीवन में फैले अंधकार को दूर कर उन्हें फिर से रोशन बना सकते हैं।

  दिया जिंदगी की प्रेरणा प्रदान करता है

           लोग ऐसा मानते हैं की दिया जलने से जो भी जिंदगी में नकरात्मक उर्जा मोजूद होती है, वह धीरे धीरे सकरात्मक उर्जा में परिवर्तित हो जाती है । यही नहीं, जिस तरह दिए की बाती सभी तकलीफों को झेल जलती रहती है, वैसे ही हमें भी कभी परेशानियों से डर कर हार नहीं माननी चाहिए और कोशिश करते रहना चाहिए ।

     दिया जलाने से दिमाग की एकाग्रता बढ़ती है

        प्राचीन समय में दिए की रौशनी से ही लोग पढ़ाई करते थे । लाइट के आने से दिए जलने तो बंद हो गए लेकिन अभी भी कई लोग दिवाली पर जलते दीयों से पढ़ाई में एकाग्रता और मन लगने की प्रार्थना करते हैं। 

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