जानिए दशहरा मनाने के पीछे की पुरी कहानी
दशहरा क्यों मानते हैं
दशहरा शौर्य और स्वास्थ्य का पर्व है। इस दिन हम अपनी भौतिक शक्ति, मुख्यतया शस्त्र और स्वास्थ्य बल का लेखा-जोखा करते हैं। अपनी शक्तियों को विकसित एवं सामर्थ्ययुक्त बनाने के लिए दशहरा पर्व प्रेरणा देता है। वैसे इस पर्व के साथ अनेकों कथाएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन मुख्यतः दुर्गा, जो शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसका इतिहास अधिक महत्त्व रखता है।
समाज को हानि पहुंचाने वाली आसुरी शक्तियों का सामूहिक और दुष्ट व्यक्तियों का प्रतिरोध करने के लिए हमें संगठन शक्ति के साथ-साथ उक्त शक्तियों का अर्जन भी करना चाहिए। उक्त आठ शक्तियों से संपन्न समाज ही दुष्टताओं का अंत कर सकता है, समाज द्रोहियों को विनष्ट कर सकता है। दुराचारी षड्यंत्रकारियों का मुकाबला कर सकता है।
दशहरे पर भगवान राम द्वारा रावण पर विजय की कथा भी सर्वविदित है। व्यक्ति के अंदर परिवार एवं समाज में असुर प्रवृत्तियों की वृद्धि ही अनर्थ पैदा करती है। जिन कमजोरियों के कारण उन पर काबू पाने में असफलता मिलती है, उन्हें शक्ति साधना द्वारा समाप्त करने के लिए योजना बनाने- संकल्प प्रखर करने तथा तदुनसार क्रम अपनाने की प्रेरणा लेकर यह पर्व आता है। इसका उपयोग पूरी तत्परता एवं समझदारी से किया जाना चाहिए।
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