आसारा मिलन के / Asara Milan Ke ( भोजपुरी कविता )
आसारा मिलन के
ब्रह्मानंद पांडे
पियवा के पाई पाती, खुशी के जरल बाती,
जईसे मनवा में टह-टह "अंजोर" हो गईल।
लिखले बाड़े सुनऽ प्यारी जल्दी धइ लेब गाड़ी,
सुनि जियरा तऽ बन में के "मोर" हो गईल।
केकरा से जा सुनाईंं, मने - मने अगराईं,
अब तऽ आसारा मिलन के "पुरजोर" हो गईल।
छत पर उचरेला काग, सुतल भाग गईल जाग,
अंगनवा में पिया-पिया "सोर" हो गईल।
बाकि बलमु ना अईले, का सवति में अझुरईले,
हिया के हुलास, अब तऽ "थोर" हो गईल।
दिन, दुपहरिया, साम, काटीं ले के उनके नाम,
बीतल राति, राहि देखत, अब तऽ "भोर" हो गईल।
आँखि भरि आवे लोर, भींजे अंचरा के कोर,
ब्रह्मानन्द अब त बिरह "घनघोर" हो गईल।
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