बेरोजगार हूं मैं / Berojgar Hun Main । कविता । कुमार सरोज ।
बेरोजगार हूं मैं
कुमार सरोज
दुनिया का सबसे फालतू, निक्कमा,
और सड़कछाप हूं मैं,
घर के लोग यही कहते हैं,
क्योंकि बेरोजगार हूं मैं।
पहले तो सिर्फ मां - बाप,
अब बीबी भी ताने देती है,
किसी को मैं क्या समझाऊ,
क्योंकि बेरोजगार हूं मैं।
कोइ ठगी करके तो कोई लूटकर,
आज पैसा कमाने लगा है,
मैने ऐसा कुछ नहीं किया,
तभी तो बेरोजगार हूं मैं।
स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी,
सब में टॉप किया हूं मैं,
फिर भी रोजगार मिला नहीं,
तभी तो बेरोजगार हूं मैं।
किसे दोष दूं - किस्मत, नसीब,
या यहां के सरकार को मैं,
मेरी बात यहां सुनता है कौन,
क्योंकि बरोजगार हूं मैं।
मेहनत और ईमानदारी की रोटी,
कमाना चाहता हूं मैं,
मगर चारों ओर तो बेईमान भरे हैं,
तभी तो बेरोजगार हूं मैं।
घूस देकर मुझसे कम अंक वाले भी,
आज नौकरी कर रहे हैं,
मैंने घूस किसी को दिया नहीं,
तभी तो बेरोजगार हूं मैं।
मेरा दुःख किसी को नज़र आता नहीं ,
क्या जवाब दूं किसी को मैं,
ना चोर हूं ना चौकीदार हूं,
साहब सिर्फ बेरोजगार हूं मैं।
कुमार सरोज
एक दम सही बात
जवाब देंहटाएंJi बहुत बहुत धन्यवाद
हटाएं