वजह तुम थी / Vajah Tum Thi । गजल । कुमार सरोज ।
वजह तुम थी
कुमार सरोज
सच में पहले कभी मैं इतना ख़ुश न था,
आज मेरी हर खुशी की वजह तुम थी।
मैं तो कब का जीना ही भूल गया था,
मगर अब मेरे जीने की वजह तुम थी।
लोग कहते हैं पहले मैं इतना ख़ुश न था,
पर उन्हें क्या बताऊं इसकी वजह तुम थी।
तुम्हारे आने से जीवन में बहार आ गया था,
सच कहूं कसम से इसकी भी वज़ह तुम थी।
मैं कभी भूल से सपने में भी सोचा न था,
आज तन्हां में मेरे रोने की भी वजह तुम थी।
अब लोग पुछते मैं हरदम उदास क्यूं रहता था,
उन्हें भला कैसे बताऊं इसकी भी वजह तुम थी।
तुम्हारे साथ बिताए पल मैं भुला सकता न था,
अब तो तनहाई में हरदम रोने की वजह तुम थी।
मैं आज भी रब से दुआ में तेरी खुशी मांगता था,
सच कहूं आज भी मेरे जीने की वजह तुम थी।
कुमार सरोज
Osm
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