गुरु चेला / Guru Chela ll कहानी ll कुमार सरोज ll

          गुरू - चेला

                        कुमार सरोज                                               

                        यह कहानी है गुरु राजेश एवं चेला रजनीश की। गुरु जी कॉलेज में साइकोलॉजी के एच.ओ.डी थे, और चेला उसी कॉलेज में स्नातक फाइनल ईयर में पढ़ता था। गुरु और चेले की भी कहानी बड़ा ही अजीब है। 

              आज से करीब 15 साल पहले चेला सड़क किनारे चार - पांच लड़कियों से मार खा रहा था तब गुरु जी उसे बचा कर अपने घर ले आए थे। तब वह मात्र 8 से 10 साल का था। तब से लेकर आज तक वह अपने गुरु जी के साथ ही रहता और उनकी सेवा करता था।



                   दोनों के विचार एकदम अलग थे । चेला जहां हमेशा लड़कियों को पटाने में लगा रहता वही गुरुजी लड़कियों से कोसों दूर भागते थे । वे बाल ब्रह्मचारी रहना चाहते थे।

           समय बीतता रहता है। चेला लड़की पटाने के जुगाड़ में हमेशा लगा रहता है । 

               उधर गुरुजी को पाने के लिए उनके कॉलेज की एक महिला प्रोफेसर डॉली सिंह जिसे कॉलेज के स्टूडेंट्स आरडीएक्स कहते थे लगी रहती है । मगर वह अभी तक कामयाब नहीं हुई थी।

       उसी कॉलेज में प्रियांशु पांडे अर्थात पी पी सर जो कि बहुत ही रसिक स्वभाव के थे , गुरु जी से हमेशा जलते रहते थे। जलने का कारण गुरुजी को प्रिंसिपल साहब के द्वारा ज्यादा तहजीब देना था । 

            गुरुजी ही एग्जाम कंट्रोलर भी थे। जिसके कारण कॉलेज का दबंग छात्र दिनेश जो कि शहर के दबंग बिल्डर गजेंद्र सिंह का बेटा था हमेशा नोट्स और क्वेश्चन पेपर के लिए गुरु जी को अपने चमचों द्वारा डराता धमकाता रहता था।

                जब गुरुजी उसके बात को नहीं मानते हैं तो वह गुरु जी को जान से मारने की कोशिश करता है। मगर ऐन वक्त पर चेला आ जाता है और अपने गुरु जी को तो बचा लेता है। गुस्से में दिनेश और उसके दोस्तों चेला को मारते तभी कॉलेज के प्रिंसिपल साहब वहां आ जाते हैं। दिनेश अपने दोस्तों सहित वहां से भाग जाता है। 

             प्रिंसिपल साहब दिनेश को कॉलेज से निकलने वाले होते हैं , मगर गुरूजी उसे बचा लेते हैं। 

       चेला गुरुजी पर हो रहे लगातार हमले को देखते हुए अब उनके बचाव करने के लिए कराटे सीखने का मन बना लेता है। 

           कॉलेज में एक  लड़कियों का ग्रुप रहता था, जिन्हें पढ़ाई - लिखाई में मन नहीं लगता है। वे सब हमेशा मौज - मस्ती के फिराक में लगे रहते थे। उसी ग्रुप की हेड शालिनी चेला को चुम्मा देने के बहाने क्वेश्चन पेपर देने के लिए राजी कर लेती है। 

              चेला क्वेश्चन पेपर देता भी हैं, और चुम्मा भी ले लेता है। मगर क्वेश्चन पेपर पिछले साल का रहता था। जिसके कारण शालिनी चेला की खूब पिटाई करती है । 

          कॉलेज में ही रौनक का एक डिजिटल ग्रुप रहता था। जिसमें लड़का और लड़की दोनों थे। सभी का बस एक ही काम था, फेसबुक पर लड़को को झूट - मूठ के प्रेम जाल में फंसाकर पैसा हड़पना एवं लड़कीयों को अपने हवस का शिकार बनाना। 

         गुरुजी शुरू से ही बजरंगबली के भक्त रहते हैं। चेला भी बजरंगबली का ही भक्त रहता था। मगर एक प्रेमी युगल के कहने पर चेला बाद में भगवान बदल लेता है। बजरंगबली के जगह पर अब वह कृष्ण भगवान की पूजा करने लगता है।

             शुरू में भगवान बदलने पर कुछ फायदा नजर आता है मगर समय के साथ उन पर से भी विश्वास उठ जाता है। फिर चेला रौनक के कहने पर ही फेसबुकिया बाबा के शरण में चला जाता है। अर्थात फेसबुक पर अकाउंट बनाकर चलाने लगता है।

            फेसबुक से फायदा तो ज्यादा नहीं होता है, मगर चेला रौनक के जाल में फंसकर पैसा बहुत लुटा देता है।

                 चेला जब कराटा सीखने जाता है तब वहां उसकी मुलाकात एक खूबसूरत लड़की सृष्टि से होती है। देखते ही वह उसका दीवाना हो जाता है।

           जब चेला को पता चलता है कि सृष्टि को कराटे के अलावा डांस एवं म्यूजिक भी पसंद है, तो चेला भी  डांस और म्यूजिक सीखने लगता है। प्रैक्टिस करने के लिए चेला एक हारमोनियम भी खरीद लेता है।

             एक बार गुरु जी के कॉलेज में ही इन्टर डांस कंपटीशन का फिनाले होता है। फिनाले में कराटे सीखने वाली लड़की सृष्टि जीत जाती है। संयोग से वह पीजी में एडमिशन चेला के साथ ही उसके कॉलेज में ले लेती है।

               सृष्टि का  झुकाव पहले दिन से ही गुरु जी की ओर ज्यादा रहता है। जिसका परिणाम यह होता है कि गुरु जी को उस लड़की से प्यार हो जाता है । 

                उधर चेला भी उसी लड़की के प्यार में पागल था।

         दोनों गुरु चेला सृष्टि को पटाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाने लगते हैं।

              अब दोनों दिन रात सिर्फ कराटे, डांस, और म्यूजिक का प्रेक्टिस करने लगते हैं। 

                 सृष्टि प्यार का ऐसा जाल बुनती  है कि गुरु जी उसमे फंसकर उसे क्वेश्चन पेपर तक दे देते हैं।

                उसके बाद तो गुरु जी के साथ जो होता है उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं किया होगा। सृष्टि वाला क्वेश्चन प्रिंसिपल को मिल जाता है। फिर क्या था, गुरूजी को कॉलेज आने से रोक दिया जाते हैं।

              प्रिंसिपल द्वारा पुरे घटना क्रम के लिए एक जांच कमेटी गठित कर दिया जाता है ।

               गुरु जी को कुछ समझ में नहीं आता है कि आखिर यह सब हुआ कैसे ?  आखिर यह किसने षड्यंत्र रचा था ?

              तभी गुरु जी को चेला के करतूत के बारे में पता चलता है। उन्हें पता चल जाता है कि वह भी सृष्टि को अपने प्यार के जाल में फंसाने में लगा है। वह अपनी आंखों से दोनों को एक साथ बैठकर कॉफी पीते एवं हंसी मजाक करते भी देख लेते हैं। 

               फिर क्या था गुरुजी अपने प्यारे चेलों को सबक सिखाने की ठान लेते हैं, और घर के दरवाजे पर ही डंडा लेकर मारने के लिए बैठ जाते हैं।

              उधर चेला को डॉली मैडम भी गुरु और सृष्टि के बीच चल रहे प्यार के तरानों का फोटो दे देती है। उसे देखकर चेले का गुस्सा भी उबाल मारने लगता है। उसके गुरुजी ही उसकी महबूबा पर डाका डालने में लगे थे। वह भी उन्हें सबक सिखाने के लिए घर की ओर चल देता है। 

        डॉली को फोटो दिनेश ही चेला को देने के लिए देता है।

                गुरु- चेला के बीच पनपे  दुश्मनी का फायदा उठाने के लिए दिनेश भी उनके घर की ओर चल पड़ता है। दिनेश अपनी योजना अनुसार दोनों में से किसी एक को मार कर, दूसरे को उसके खून के इल्जाम में जेल भेजवा देता। 

              मगर सही समय पर दिनेश के योजना की जानकारी सृष्टि को भी हो जाती है। उससे रहा नहीं जाता है।   वह अपनी गलती को भी सुधारना चाहती थी। इसीलिए सच्चाई बताने के लिए वह भी गुरु जी के घर की ओर चल देती है।  

            उधर घर के बाहर ही गुरु - चेला एक - दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप का तीर चलाते हुए लड़ने लगते हैं। मगर तभी सृष्टि वहां आ जाती है। 

       सृष्टि से जब दोनों को सच्चाई का पता चलता है तो सुनकर गुरु चेला के पैरों तले की जमीन खिसक जाती है । सृष्टि अभी तक दोनों से सिर्फ प्यार का नाटक कर रही थी। उसे दिनेश जबरदस्ती ब्लैकमेल करके ये सब काम करवा रहा था।

           दिनेश और सृष्टि के पापा  अच्छे दोस्त थे। सृष्टि जब डांस कंपटीशन जीतती है, तो दिनेश के पिता अपने यहां पार्टी देते हैं। दिनेश  का घर रांची में ही था, जबकि सृष्टि के माता पिता धनबाद में रहते थे। सृष्टि तो यहां हॉस्टल में पढ़ने लिए रहती थी। इसीलिए सृष्टि के पापा दिनेश के घर पार्टी लिए तैयार हो गए थे।

               पार्टी में दिनेश सृष्टि को नसीली चीज खिला कर धोखे से अर्धनंग फोटो अपने साथ खींच लेता है। उसी फोटो को दिखा कर वह इस ब्लैकमेल कर रहा था। 

                मगर जब गुरू एवम चेला की जान जाने कि नौवत आ जाती है तो सृष्टि से रहा नहीं जाता है, और वह तभी दोनों को सच्चाई बताने आ जाती है। 

            सृष्टि अभी दोनों को सारी सच्चाई बताते ही रहती हैं कि वहां दिनेश भी आ जाता है, एवं सच्चाई कबूल करते हुए गुरू एवम चेला को मारने लगता है। उसे तो अपने अपमान का बदला लेना था।

              दिनेश गुरु एवम चेला को कुछ कर पाता कि तभी निगम जो इंटर डांस कॉलेज कंपटीशन में रनर अप था, और इस समय रांची का नया एसपी बन चुका था, आ जाता है। वह गुरू जी से ही मिलने आते रहता है।

           वह दिनेश को पकड़ कर थाने में बंद कर देता है। सृष्टि भी वापस हॉस्टल आ जाती है।

               गुरु एवम चेला को अब खुद पर ही सर्मिंदगी होने लगी थी। इसलिए दोनों बिना किसी से कुछ बोले गलती से एक दूसरे के कमरे में आकर लेट जाते हैं ।

           गुरु जी फेसबुकिया बाबा के नीचे फोटो फ्रेम में अपना फोटो देखकर दंग रह जाते हैं । उन्हें ये आभास हो जाता हैं कि चेला उन्हें कितना चाहता था।

             उधर चेला को भी गुरु जी के कमरे में लेटकर यह आभास हो जाता हैं की गुरु जी भी उसे कितना प्यार करते थे।

             तभी सृष्टि का फोन दोनों के पास आता है। वह कल शादी के लिए दोनों को ही मंदिर बुलाई थी। दोनों सुन खुशी के मारे नाचने लगते हैं।

              अगले दिन जब दोनों बिना किसी को बताए शादी के लिए मंदिर पहुंचते हैं तो वहां के दृश्य को देखकर दोनों के ऊपर मानो पहाड़ टूट कर गिर जाता है। वहां सृष्टि और निगम शादी के पवित्र बंधन में बंधे खड़े थे।

               निगम ही बताता है कि दोनों की सगाई तो पहले ही हो गई थी, मगर आईपीएस की ट्रेनिंग में चले जाने के कारण शादी नहीं हो पाई थी। उस समय कॉलेज के प्रिंसिपल साहब, डॉली मैम ,पीपी सर सहित बहुत से स्टूडेंट भी मंदिर में आए हुऐ थे। 

            वही प्रिंसिपल सर सभी को बताते हैं कि गुरु जी को अब आरोप मुक्त कर दिया गया है।

                   सभी के जाने के बाद गुरुजी चेला को लेकर अपनी कार से घर की ओर चल देते हैं। रास्ते में ही गुरु जी बताते हैं कि वह शादी खुद नहीं बल्कि चेला का ही करवाने आए थे। तभी चेला भी बताता है कि बिना गुरु की शादी के वह कैसे शादी कर सकता है। वह भी अपने गुरु की शादी करवाने के लिए ही मंदिर आया था। सच्चाई से दोनों जब अवगत होते हैं तो खुशी से बीच सड़क पर ही नाचने लगते हैं। 

               तभी निगम और सृष्टि का वीडियो कॉल चेला के मोबाइल पर आता है। सभी हंसते हुए बात करते है, जैसे अभी तक कुछ कही हुआ ही नहीं था।

                                                                       कुमार सरोज

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