चेहरा उसका / Chehara Usaka l गजल l कुमार सरोज l

       चेहरा उसका  

                       कुमार सरोज

हर चेहरे के पीछे ढूंढता हूं चेहरा उसका, 

न मिलता है सूरत, न ही चेहरा उसका । 


हर आते-जाते हूर में खोजता हूं नूर उसका,

शायद किसी में मिल जाए अक्स उसका।



 कितना नदान हूं, सोचकर हैरान रह जाता,

 भला मैंने अभी देखा कहां है चेहरा उसका।


फिर कैसे मिलेगी, भला अब ढूंढूं कहां मैं,

कमसिन खूबसूरत भोला सा चेहरा उसका।


भगवन बस तू इतनी सी हम पे दया करना,

बस रात सपने में दिखा देना चेहरा उसका।


जीना सफल हो जाएगा, मरना भी आसान, 

सपने में ही सही देख तो लूंगा चेहरा उसका।                                             

                     कुमार  सरोज

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