निमकी चाची / Nimaki Chachi l कहानी l कुमार सरोज l
निमकी चाची
कुमार सरोज
जहानाबाद जिले में एक छोटा सा गांव है नदौरा। इसी गांव में मंगल अपनी पत्नी चंपा के साथ रहता है। मंगल एक किसान है ।
दोनों पति पत्नी अपने बेटे राकेश के पढ़ाई लिखाई एवं उसके उज्जवल भविष्य के लिए दिन - रात खेतों में काम करते हैं। दोनों का एक ही सपना था कि किसी तरह अपने बेटे को पढ़ा लिखा कर एक अच्छी नौकरी लगवा दें ताकि वह जिंदगी भर खुश रहे।
राकेश पास के ही एक शहर टिकारी में पड़ता है। वह पढ़ने में तेज है। वह भी अपने माता-पिता के अरमानों को पूरा करना चाहता है।
समय बीतता रहता है। मंगल दिन रात अपने खेतों में काम करते रहता है। उसकी पत्नी चंपा उसे समझाती भी है कि मेहनत कम करे। मगर उस पर तो बेटे को पढ़ा लिखा कर हाकिम बाबू बनाने का जुनून सवार था। जिसके कारण ही अब उसकी तबीयत आए दिन खराब रहने लगी थी।
उसकी पत्नी चंपा उसे बहुत मना करती है, लेकिन वह नहीं मानता है। उस पर तो सिर्फ एक ही भूत सवार था कि वह अपने बेटे को किसी भी चीज की कमी ना होने दें।
अपने पति के बीमारी के कारण चंपा भी पैसा कमाने के लिए निमकी बनाकर आस-पास के गांव में बेचने लगती है। इसीलिए गांव के लोग उसे निमकी चाची भी कहने लगते हैं।
समय बीतता रहता है। राकेश को सरकारी तो नहीं मगर एक अच्छे कंपनी में प्राइवेट नौकरी लग जाती है।
नौकरी लगते ही मंगल अपने बेटे के शादी करने का मन बना लेता है।
मंगल दूर के अपने एक रिश्तेदार के कहने पर शहर में बेटे की शादी अपने से अमीर घर में एवं बहुत पढ़ी-लिखी लड़की रीना से ठीक कर देता हैं। शादी का दिन भी निश्चित हो जाता है। लेकिन नियति को तो कुछ और ही मंजूर था। शादी के कुछ दिन पहले ही मंगल मर जाता है। चंपा के ऊपर तो मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है।
कुछ दिन के बाद ही गांव वाले एवम शादी करवाने वाले रिश्तेदार के कहने पर निमकी अपने बेटे की शादी उसी लड़की से करवा देती है, जिससे उसकी शादी पहले से ठीक थी।
शादी के कुछ दिन बाद ही राकेश अपनी पत्नी को गांव में ही छोड़कर शहर चला जाता है ।
राकेश की पत्नी रीना कुछ दिन तो अपने सास के साथ ठीक से रहती है, मगर कुछ ही दिन के बाद वह अपनी सास से बात बात पर झगड़ना शुरू कर देती है। उसे गांव का माहौल अच्छा नहीं लगता है। बेचारी चंपा अपनी शहरी बहू की सारी ताने और बातें चुपचाप सुनते रहती हैं।
कुछ दिन के बाद जब राकेश अपने घर आता है तो उसकी पत्नी रीना भी उसके साथ जाने की जिद्द कर बैठती है। राकेश उसे बहुत समझाता है कि उसकी मां बूढ़ी हो चुकी है और अब वह अकेली घर में कैसे रहेगी। लेकिन रीना किसी की एक नहीं सुनती है।
अंततः वह भी राकेश के साथ शहर आ जाती है। बेचारी बूढ़ी चंपा अकेले घर पर रह जाती है।
शहर आते ही रीना का स्वभाव और बदल जाता है। वह बात बात पर राकेश से भी लड़ने लगती है। वह हमेशा कोई न कोई महंगा सामान खरीदने की जिद्द कर बैैठती है। अपनी मांग की पूर्ति नहीं होने पर राकेश को ताने देना शुरु कर देती है। वह राकेश को अब अपनी मां के पास भी जाने नहीं देेती है। न ही पैसा या किसी तरह का मदद करने देती है। राकेश चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता है।
इधर चंपा अकेली अपने गांव में अपने बेटे और बहू के घर आने के आस में टकटकी लगाए रहती है। मगर कोई फायदा नहीं होता है ।
चंपा अपने बेटे को लेकर बहुत परेशान रहने लगती है। उसे कोई काम करने में भी मन नहीं लगता है। अब तो उसके खाने के भी लाले पड़ने लगे थे।
थक हार कर चंपा फिर से निमकी बनाकर इस बुढ़ापे में भी बेचना शुरु कर देती है।
समय बीतता रहता है। अचानक एक दिन राकेश शहर से घर आता है। वह बहुत उदास था। मां के लाख पूछने पर जब वह सच्चाई बताता है तो सुनकर मां भी दंग रह जाती है।
रीना राकेश के नाम पर बैंक से 5 लाख का कर्ज लेकर बगल के ही एक लड़के के साथ भाग गई थी। जिसके कारण राकेश की ऑफिस में बहुत बदनामी होने लगती है। इसलिए वह नौकरी छोड़कर गांव आ गया था।
बैंक का पूरा पैसा भी राकेश को ही देना था। उसे समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि अब वह करे तो क्या करें।
चंपा यानी निमकी चाची निमकी बेच बेच कर कुछ पैसे जमा किए हुए थी। जब अपने बेटे की परेशानी को देख कर निमकी चाची से रहा नहीं जाता है, तो वह अपनी जमा पूंजी और खेत को गिरवी रखकर अपने बेटे को पैसा देती है।
राकेश जाकर बैंक का पैसा जमा कर देता है।
राकेश इस घटना के बाद अब गांव में ही रहने लगता है। उसे समझ में आ जाता है कि मां - बाप की अनदेखी एवम इज्जत नहीं करने पर क्या होता है।
काश वह अपनी मां की बात को मान कर अपनी पत्नी को साथ नहीं ले जाता और उसे इस तरह मनमानी करने नहीं देता तो शायद आज उसकी हालत ऐसी नहीं होती।
निमकी चाची बहुत जीवट इंसान थी तभी इतनी कठिनाइयों को झेलने के बाद भी सही सलामत जिंदा रह गई थी। नहीं तो आज हमारे समाज में कितनी माताएं ऐसी हैं , जो अपने बच्चे द्वारा त्यागे जाने के कारण आए दिन मर जा रही थे ।
कुमार सरोज
बहुत ही अच्छी कहानी
जवाब देंहटाएंNice
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