फकीरा भाग गया / Fakira Bhag Gaya l कहानी l कुमार सरोज l

      फकीरा भाग गया
         कुमार सरोज


              हमारे समाज में भी बहुत तरह के लोग रहते हैं।  कुछ अपने बच्चों की शादी विवाह में दहेज की ऐसे  मांग करते हैं जैसे लगता है वह अपने बेटे की शादी नहीं कोई अपने घर का बहुमूल्य सामान बेच रहे हो। जिसका नतीजा यह होता है कि या तो लड़के को अच्छी लड़की नहीं मिल पाती या फिर अच्छे घर में उसका रिश्ता नहीं हो पाता है या कभी-कभी तो ज्यादा दहेज के लोन में लड़के की शादी भी समय से नहीं हो पाती है।



                यह कहानी भी ऐसे ही एक लड़के  फकीरा की है। फकीरा पटना से सटे एक गांव नौबतपुर में रहता है। वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा है।  

            उसके  पिता जमुना प्रसाद किराने की एक दुकान चलाते हैं। घर में मां तेतरी के अलावा और कोई  नहीं है। 

              फकीरा के माता-पिता एक नंबर के कंजूस और लालची किस्म के इंसान हैं। 

            फकीरा ज्यादा खूबसूरत या पढ़ने में तेज नहीं है फिर भी उसके पिता उसकी नौकरी  मुखिया को पैसा देकर पास के ही एक प्राथमिक विद्यालय में पंचायत शिक्षक के रूप में करवा देते हैं। 

             फकीरा की नौकरी लगते ही उसके माता पिता उसके लिए शादी की बात करने लगते हैं। बहुत से लोग शादी के लिए रिश्ता लेकर आते हैं,  लेकिन फकीरा के माता पिता के ज्यादा दहेज की मांग के कारण कोई शादी करने को तैयार नहीं होता है।

                  फकीरा के माता पिता उसके शुरू से लेकर पढ़ाई लिखाई का खर्चा  खाने पीने का खर्चा का हिसाब करके करीब 25 लाख दहेज की मांग करते हैं।  भला एक पंचायत शिक्षक को 25 लाख दहेज के रूप में कौन देता। जिसका नतीजा यह हो रहा था कि फकीरा के लिए रिश्ते तो बहुत आ रहे थे मगर दहेज की मांग सुनकर ही सभी  वापस लौट जा रहे थे ।

          फकीरा के सभी दोस्त गणेश, मदन, अरविंद का शादी हो चुका था।  गणेश का तो बच्चा भी हो गया था। उसके सभी दोस्त अब ताने देने लगे थे।  मगर भला इसमें फकीरा का क्या दोष था। वह तो अपने माता-पिता के दहेज के लोभ में फंसकर  अपनी जवानी कुर्बान कर रहा था। 

                फकीरा जब अपने माता पिता को समझाता कि भला उसे इतना दहेज कौन देगा तो उल्टे वे लोग उसे ही डांटने लगते। 

              फकीरा अब 30 साल का हो गया था। उसके दोस्त उसे दिन-रात ताने मारते रहते एवं उसे घर से भाग जाने की सलाह देते रहते। अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो  उससे अब बुढ़ापे में कोई शादी नहीं करेगा और उसे जिंदगी भर कुंवारा रहना पड़ेगा। 

              और अंत में थक हार कर फकीरा अपने मां-बाप के हठ के कारण बगल के ही एक गांव की लड़की नेहा के साथ  चुपके से शादी कर लेता है। इस काम में उसके दोस्त उसे बहुत मदद करते हैं।

                     इधर फकीरा के माता-पिता को जैसे  ही बगल के एक आदमी से पता चलता है कि फकीरा भाग गया और भाग कर किसी से शादी कर लिया,  तो सुन दोनों अपने दहेज के रूप में मिलने वाले पैसे को लेकर जो अब नहीं मिलने वाला था माथा पीटने लगते हैं। 


कुमार सरोज



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